Maharashtra MMRDA Land Digitization: एमएमआरडीए ने रणनीति के तहत अपनी जमीन को डिजिटल कर फंडिंग का आधार बनाने की तैयारी शुरू कर दिया है। इसके तहत अपनी संपत्तियों का इस्तेमाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने के नए माध्यम के रूप में किया जाएगा।
प्रस्तावित डेल्टा एक्ट के तहत जमीन के टोकनाइजेशन से 33,954 हेक्टेयर से अधिक सरकारी जमीन की वित्तीय क्षमता को इस्तेमाल करने का रास्ता खुल सकता है।
इससे बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग के नए विकल्प मिलेंगे और एमएमआरडीए की कर्ज पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। एमएमआरडी अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्राधिकरण अपनी जमीन की परिसंपत्तियों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकेगा।
परियोजनाओं की वास्तविक वित्तीय जरूरत के आधार पर जमीन से मूल्य अनलॉक करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। डिजिटाइजेशन एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन एसेट एक्ट का उद्देश्य भौतिक जमीन को डिजिटल टोकन में बदलकर पारंपरिक कर्ज के अलावा वित्त जुटाने के नए रास्ते तैयार करना है।
एमएमआरडीए के पास ठाणे शहर, रायगढ़ और पालघर जिलों के 1,324 गावों में 33,954।61 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। यह जमीन प्राधिकरण को फ्रीहोल्ड आधार पर हस्तांतरित की गई है।
कल्याण, भिवंडी, ठाणे, पनवेल, अलीबाग, पेण, पालघर जिला और वसई जैसे इलाकों में बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ जमीन का मूल्य भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यह भूमि एमएमआरडीए के लिए भविष्य में बड़ी वित्तीय परिसंपत्ति साबित हो सकती है।
वर्ष 2026-27 में जमीन की बिक्री और संबंधित शुल्क से 11,177 करोड़ से अधिक जुटाने का लक्ष्य रखा है। बीकेसी से 5.534.95 करोड़ रुपए की आय का अनुमान है, वहीं, वडाला ट्रक
टर्मिनल और वडाला नोटिफाइड एरिया से करीब 1,630 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है, कर्नाला साई-चिरनेर न्यू टाउन डेवलपमेंट को जमीन से संबंधित आय के रूप में 4,000 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है।
फिलहाल, एमएमआरडीए की परियोजनाओं की फंडिंग में जमीन के मुद्रीकरण से प्राप्त राशि को इक्विटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि शेष जरूरत कर्ज के जरिए पूरी की जाती है। उन्होंने कहा कि बेहतर कैश फ्लो से एमएमआरडीए का वित्तीय प्रबंधन मजबूत होगा और परियोजनाओं को अधिक कुशलता से पूरा करने में मदद मिलेगी।