मंत्री आशीष शेलार (सौजन्य-एक्स) 
मुंबई

'2022 में उद्धव ने किया था स्वीकार और अब...', हिंदी विवाद पर भड़के मंत्री शेलार

महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के खिलाफ विद्रोह तेज हो चला है। शिवसेना यूबीटी और मनसे के आंदोलन का ऐलान करने के बाद मंत्री आशीष शेलार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और उद्धव ठाकरे पर हमला बोला है।

प्रिया जैस

मुंबई: महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के विरोध में माहौल गरमा गया है। राज्य की स्कूलों में त्रिभाषा फॉर्मूला लागू करने के खिलाफ शिवसेना यूबीटी से उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से राज ठाकरे ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। इस पूरे मुद्दे पर भाजपा मंत्री आशीष शेलार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

त्रिभाषा सूत्र में हिंदी को तीसरा स्थान देने के मामले में मंत्री आशीष शेलार कहते हैं, "2022 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए, यह उद्धव ठाकरे ही थे जिन्होंने आयोग की रिपोर्ट के आधार पर त्रिभाषा सूत्र में हिंदी को शामिल करने की बात स्वीकार की थी। उद्धव ठाकरे को यह याद रखना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पहली बार 1968 में कांग्रेस सरकार के दौरान पेश की गई थी, कांग्रेस में उद्धव के सहयोगियों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए।"

केंद्र सरकार ने दिया शास्त्रीय भाषा का दर्जा - शेलार

शिवसेना यूबीटी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा संयुक्त विरोध प्रदर्शन पर, मंत्री आशीष शेलार ने कहा, "विरोध मार्च निकालना सभी का अधिकार है, चाहे राज ठाकरे अकेले करें, संयुक्त रूप से करें या किसी तीसरे पक्ष को साथ लेकर आएं, इसमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस राज्य में एकमात्र अनिवार्य भाषा मराठी है। भाजपा मराठी भाषा के प्रति दृढ़ और प्रतिबद्ध है। भाजपा और केंद्र सरकार ने ही मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है।"

लोगों से की आंदोलन में जुड़ने की अपील

आपको बताते चले कि राज्य की स्कूलों में हिंदी भाषा को तीसरी भाषा का दर्जा देने के खिलाफ मनसे और यूबीटी ने मोर्चा खोला है। इसके खिलाफ राज ठाकरे 5 जुलाई और उद्धव ठाकरे 7 जुलाई को मुंबई में भव्य आंदोलन करने जा रहे है। उद्धव ठाकरे का कहना है कि जब तक हिंदी की अनिवार्यता का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

ठाकरे ने इसके लिए सभी मराठी भाषी नागरिकों, कलाकारों, साहित्यकारों, खिलाड़ियों, छात्रों और उनके पालकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। इतना ही नहीं उन्होंने बीजेपी के मराठी समर्थकों को भी इस आंदोलन में शामिल होने का आमंत्रण दिया है और कहा है कि यह समय हमे मराठी अस्मिता के लिए एकजुट होकर लड़ना हैं।

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