मेघराज राजेभोसले (सोर्सः फाइल फोटो) 
मुंबई

अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल चुनाव 2026: 'समर्थ पैनल' का सूपड़ा साफ, मेघराज राजेभोसले को मिली बड़ी जीत

Marathi Cinema: अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल चुनाव में मेघराज राजेभोसले के 'समर्थ पैनल' ने सभी 17 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। वर्षा उसगांवकर निर्विरोध चुनी गईं, जबकि चुनाव में कई विवाद भी हुऐ।

आलोक उमाकृष्ण

Marathi Chitrapat Mahamandal Election Results 2026: अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल के बहुप्रतीक्षित चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिसमें मेघराज राजेभोसले के नेतृत्व वाले 'समर्थ पैनल' ने ऐतिहासिक और एकतरफा जीत हासिल की है। इस चुनाव में विरोधी गुटों को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, क्योंकि समर्थ पैनल के सभी उम्मीदवारों ने अपनी जीत का परचम लहराया है। मराठी मनोरंजन उद्योग (एम-टाउन) के इस सबसे बड़े संगठन के चुनाव परिणामों ने फिल्म जगत के भीतर सत्ता के नए समीकरण तय कर दिए हैं।

सीटों का पूरा गणित और चुनावी मुकाबला

यह चुनाव कुल 17 सीटों के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें से तीन महत्वपूर्ण सीटों पर पहले ही उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन हो चुका था। इसके बाद बची हुई 14 सीटों के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी की गई थी। मतगणना के बाद आए नतीजों में 'समर्थ पैनल' ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए सभी 14 सीटों पर कब्जा जमा लिया।

इस चुनाव में निर्विरोध चुने गए तीन दिग्गज सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं:

  • वर्षा उसगांवकर: प्रसिद्ध अभिनेत्री, जिन्हें अभिनेत्री प्रतिनिधि के रूप में चुना गया
  • आनंद शिंदे: मशहूर गायक, जिन्हें संगीत और पार्श्वगायन विभाग का प्रतिनिधित्व मिला
  • विजय खोचीकर: वरिष्ठ संपादक, जिन्हें संकलन विभाग से निर्विरोध चुना गया

मतदान के जरिए जीतने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में सुनील महाजन, दीपक कदम, अजीत शिरोळे, राज काजी, सुशांत शेलार, धनाजी यमकर, सुभाष नकाशे, शरद चव्हाण, प्रवीण पाटील, चैत्राली डोंगरे, रवींद्र गावडे, गणेश गारगोटे और विकास तोरणे शामिल हैं। इन सभी की जीत के साथ राजेभोसले ने महामंडल पर अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी है।

विवादों और राजनीतिक आरोपों का साया

इस चुनाव के दौरान फिल्म जगत के भीतर की अंदरूनी राजनीति भी खुलकर सामने आई। वरिष्ठ अभिनेता विजय पाटकर ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व और विरोधी गुटों पर गंभीर आरोप लगाए। पाटकर का दावा था कि गंदी राजनीति के चलते उन्हें जानबूझकर नामांकन पत्र भरने से रोका गया, जिससे वे चुनाव प्रक्रिया से बाहर हो गए। इस आरोप ने फिल्म इंडस्ट्री के भीतर लोकतंत्र और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

इसके अलावा, अभिनेत्री नीलम शिर्के की उम्मीदवारी वापस लेना भी चर्चा का विषय रहा। उन्होंने दिग्गज अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर के चुनावी मैदान में उतरने के बाद सम्मान स्वरूप और रणनीतिक कारणों से अपने कदम पीछे खींच लिए थे, जिससे वर्षा उसगांवकर की राह आसान हो गई थी।

मतगणना केंद्र के बाहर 'अंधविश्वास' की सनसनी

चुनावी सरगर्मी के बीच कोल्हापुर स्थित मतगणना केंद्र के बाहर एक बेहद अजीब और चौंकाने वाली घटना सामने आई। मतगणना शुरू होने से ठीक पहले केंद्र के ठीक बाहर रखी एक कुर्सी पर नींबू, अंगारा (राख) और अगरबत्ती रखी हुई मिली।

इस रहस्यमयी और अजीबोगरीब दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों, उम्मीदवारों और समर्थकों के बीच भारी सनसनी फैल गई। कई लोगों ने इसे सीधे तौर पर 'जादू-टोने' और 'अंधविश्वास' से जोड़कर देखा। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस घटना की जमकर चर्चा हुई कि आखिर चुनाव जीतने के लिए इस तरह के हथकंडे किसने अपनाए।

तमाम विवादों, राजनीतिक आरोपों और अंधविश्वास के ड्रामे के बीच आखिरकार मेघराज राजेभोसले का जादू चल गया और मराठी चित्रपट महामंडल में अब पूरी तरह से 'समर्थ पैनल' का वर्चस्व स्थापित हो गया है। आगामी कार्यकाल में अब इस नए बोर्ड पर मराठी सिनेमा की दशा और दिशा सुधारने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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