Maratha Reservation Row Manoj Jarange Vs Radhakrishna Vikhe Patil: मुंबई में मराठा आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार और उपसमिति पर तीखे सवाल उठाए हैं।
जरांगे पाटिल ने कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि वे उपसमिति के अध्यक्ष के रूप में बेहतर काम करेंगे, लेकिन उन्होंने निराश किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उपसमिति की बैठकों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में इस समिति को भंग कर देना चाहिए। साथ ही उन्होंने मराठा समुदाय के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग भी उठाई।
Manoj Jarange Patil का कहना है कि मराठा और कुणबी समुदाय के मुद्दों के समाधान के लिए अलग मंत्रालय बनाना जरूरी है। वे इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी मांग करने की बात कह रहे हैं।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि हैदराबाद गजट लागू होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को कुणबी प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं और प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने बताया कि उपसमिति के गठन से पहले करीब 2 लाख प्रमाणपत्र जारी किए गए थे, जबकि समिति बनने के बाद अब तक 54,000 लोगों को प्रमाणपत्र दिए जा चुके हैं।
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मराठा आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र रहा है। ताजा बयानबाजी के बाद एक बार फिर यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है।