मक्के की कीमतों में आई बढ़ोतरी (सोर्स: AI)
मुंबई

मक्का में आई मिठास: एथेनॉल मिलों की खरीदारी से मक्का हुआ हॉट, कीमतें ₹300 प्रति क्विंटल तक उछले दाम

Maize Prices Rise: कम आवक, सीमित बिकवाली और एथेनॉल मिलों की बढ़ती मांग से मक्का के भाव मजबूत हुए हैं। यूपी में कीमतें ₹300 प्रति क्विंटल तक सुधरीं, आगे तेजी की उम्मीद है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

Maize Prices Rise Ethanol Demand: एथेनॉल की बढ़ती मांग के चलते देश की प्रमुख मंडियों में मक्का के भाव में मजबूती का रुख जारी है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर ने बताया कि मंडियों में दैनिक आवक घटने और स्टॉकिस्टों द्वारा सीमित बिकवाली करने से बाजार को अच्छा आधार मिला है। साथ ही खरीफ फसल की बुआई में देरी और उत्पादकता को लेकर चिंताओं ने भी भावों को सहारा दिया है।

राज्यवार भाव में बढ़ोतरी

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सत्रों में मक्का ₹30 से ₹40 प्रति क्विंटल तक मजबूत हुआ है। खुले बाजार में भाव ₹2,180 से ₹2,200 और एक्स-वेयरहाउस रेट करीब ₹2,310 प्रति क्विंटल चल रहा है। अपने मौसमी निचले स्तर से अब तक इसमें लगभग ₹300 प्रति क्विंटल की रिकवरी आ चुकी है। वहां दैनिक आवक घटकर 5,000 से 7,000 क्विंटल रह गई है।

बिहार में भाव ₹15 बढ़कर ₹2,250 से ₹2,375 प्रति क्विंटल पर पहुंच गए हैं। पूर्वी भारत में एथेनॉल डिस्टिलरियां सबसे बड़ी खरीदार बनी हुई हैं। चावल आधारित फीडस्टॉक की कमी की आशंका से डिस्टिलरियां ₹2,400 प्रति क्विंटल तक आक्रामक खरीद कर रही हैं।

महाराष्ट्र में मक्का

₹10 बढ़कर ₹2,400 से ₹2,430 प्रति क्विंटल बोला गया। तेजी के बाद हल्की मुनाफावसूली दिखी, लेकिन स्टॉकिस्टों ने माल रोका हुआ है। तमिलनाडु में डिलीवर्ड मक्का ₹2,800 से ₹2,850 प्रति क्विंटल पर स्थिर है। दक्षिण भारत में हाल ही में रेल रैक से बड़ी आपूर्ति पहुंचने से खरीदारी धीमी है, लेकिन 20 अगस्त के बाद मांग फिर बढ़ने की उम्मीद है।

पोल्ट्री-निर्यात सुस्त, आगे का रुख मिश्रित

पोल्ट्री और स्टार्च उद्योगों की मांग फिलहाल सुस्त है। महाराष्ट्र-तमिलनाडु की फीड मिलें सिर्फ जरूरी जरूरत के लिए खरीद कर रही हैं। तेलंगाना सरकार के टेंडर भी बाजार तय करेंगे। व्यापारियों का मानना है कि टेंडर में भाव ₹2,600* से नीचे नहीं जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में वियतनामी मक्का $260 प्रति टन पर उपलब्ध है, जिससे भारतीय मक्का निर्यात के लिए महंगा है। कुल मिलाकर कम आवक, स्टॉकिस्टों की पकड़ और एथेनॉल मिलों की लिवाली से गिरावट पर सपोर्ट बना रहेगा। अगस्त के आखिर में दक्षिणी मांग लौटने से और तेजी संभव है।

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