जयंत पाटिल, मेघना बोर्डिकर व सुधीर मुनगंटीवार (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

महाराष्ट्र महिला आयोग के बजट पर विधानसभा में हंगामा! मुनगंटीवार-पाटिल और मंत्री बोर्डिकर में तीखी बहस

Maharashtra Budget 2026: महाराष्ट्र विधानसभा में महिला आयोग की वित्तीय स्वायत्तता और बजट आवंटन में विसंगतियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें फंड की भारी कमी के दावे किए गए।

आकाश मसने

Maharashtra Women Commission Budget Controversy: महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार को उस समय माहौल गर्मा गया जब राज्य महिला आयोग के बजट और उसके वास्तविक खर्च के बीच बड़े अंतर का मुद्दा उठा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ सदस्य सुधीर मुनगंटीवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जयंत पाटिल ने इस मुद्दे पर महिला एवं बाल विकास मंत्री मेघना बोर्डिकर को घेर लिया।

पूर्व मंत्री मुनगंटीवार ने विशेष रूप से आयोग की वित्तीय स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि एक स्वतंत्र निकाय होने के बावजूद आयोग की खर्च संबंधी फाइलें मंजूरी के लिए बार-बार मंत्रालय (सचिवालय) क्यों भेजी जा रही हैं।

बीजेपी विधायक मुनगंटीवार ने उठाए सवाल

प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि महिला आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और इसे अपनी जरूरतों के अनुसार खर्च करने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर छोटी फाइल को मंत्रालय भेजना अनुचित है। उनका तर्क था कि पर्याप्त धनराशि और वित्तीय स्वतंत्रता न होने के कारण आयोग के महत्वपूर्ण कार्य, जैसे कि जागरूकता अभियान और अनुसंधान गतिविधियां, बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

आंकड़ों पर छिड़ी जंग: कौन सच्चा, कौन झूठा?

इस बहस के दौरान सबसे चौंकाने वाला पहलू बजट के आंकड़ों में विसंगति रही। मंत्री मेघना बोर्डिकर ने सदन को बताया कि सरकार ने कभी धन नहीं रोका और आयोग की मांग के अनुसार सहायता प्रदान की है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023-24 के लिए 24 करोड़ रुपये की मांग पूरी की गई और 2026-27 के लिए 18.35 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, विपक्ष के जयंत पाटिल ने इन आंकड़ों को सिरे से खारिज कर दिया। पाटिल ने सदन में वास्तविक जारी राशि का विवरण पेश करते हुए मंत्री पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। पाटिल द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में बजट 15.08 करोड़ रुपये था, लेकिन केवल 4.63 करोड़ रुपये जारी हुए। 2024-25 में 15.28 करोड़ रुपये का प्रावधान था, मगर मात्र 5.83 करोड़ रुपये दिए गए। इसके अगले वर्ष 18.09 करोड़ रुपये के प्रावधान के मुकाबले केवल 6.71 करोड़ रुपये ही जारी किए गए।

आयोग की ओर से कोई भी मांग लंबित नहीं

इन आरोपों के जवाब में मंत्री बोर्डिकर ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि धनराशि आवश्यकता के आधार पर जारी की जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में मंत्रालय के पास आयोग की ओर से कोई भी वित्तीय मांग लंबित नहीं है।

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