महाराष्ट्र में SIR मतदाता सूची की गड़बड़ी सुधरी, 2.70 लाख मतदाताओं का जन्म वर्ष 1900 दर्ज था।
गलती के कारण मतदाताओं की उम्र 101 से 150 वर्ष दिखाई दे रही थी।
नासिक के कलवन, चांदवड और देवलाली में 88% मामले सामने आए।
निर्वाचन आयोग ने एक महीने से अधिक समय बाद तकनीकी त्रुटि सुधार दी।
Maharashtra Electoral Roll SIR: महाराष्ट्र में विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत तैयार की गई मतदाता सूची में बड़ी तकनीकी गड़बड़ी सामने आई थी। राज्य के 2,70,313 मतदाताओं का जन्म वर्ष गलती से 1900 दर्ज हो गया था।
इसके चलते मसौदा मतदाता सूची में उनकी उम्र 101 से 150 वर्ष के बीच दिखाई दे रही थी। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय की ओर से मामला उठाए जाने के एक महीने से अधिक समय बाद भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने इस त्रुटि को सुधार दिया है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रभावित मतदाताओं में से 2,37,974 यानी करीब 88 प्रतिशत नासिक जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज थे। इनमें कलवन (अनुसूचित जनजाति), चांदवड और देवलाली (अनुसूचित जनजाति) शामिल हैं। शेष 32,339 मतदाता राज्य के अन्य हिस्सों में फैले हुए थे।
इस गड़बड़ी के कारण मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों की उम्र असामान्य रूप से अधिक दिखाई दे रही थी। ऐसे में निर्वाचन संबंधी आंकड़ों की सटीकता को लेकर सवाल उठे।
यह पता लगाने के लिए कि गलती SIR से पहले की मतदाता सूची में मौजूद थी या संशोधन की प्रक्रिया के दौरान हुई, CEO कार्यालय ने निर्वाचन आयोग के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी थी। विभाग का नेतृत्व सीमा खन्ना कर रही थीं।
कार्यालय ने 2 सितंबर को पहली बार पत्र लिखकर SIR से पहले की सूची में दर्ज जन्मतिथि और उम्र के साथ-साथ SIR-2026 के गणना प्रपत्रों में दर्ज जन्मतिथि का डेटा एक्सेल प्रारूप में मांगा। इसके बाद 8 सितंबर को इस संबंध में दोबारा अनुरोध किया गया।
डेटा उपलब्ध नहीं होने पर महाराष्ट्र राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने 17 सितंबर को वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग को पत्र लिखा। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को बिना देरी के आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया।
पत्र में चोकलिंगम ने बताया कि राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में 2,70,313 मतदाताओं की उम्र मसौदा मतदाता सूची में 101 से 150 वर्ष के बीच दर्ज हुई थी।
निर्वाचन आयोग द्वारा तकनीकी त्रुटि सुधार दिए जाने से गलत जन्म वर्ष के कारण दिखाई दे रही आयु संबंधी विसंगति दूर हो गई है। यह मामला मतदाता सूची तैयार करने में डेटा की जांच और तकनीकी सत्यापन के महत्व को रेखांकित करता है।