महाराष्ट्र PWD के ठेकेदारों को अब तक करीब 9,700 करोड़ रुपये का भुगतान जारी।
बाकी बकाया चुकाने के लिए वित्त विभाग से अतिरिक्त निधि मांगी गई।
एक करोड़ रुपये से कम के काम करने वाले 4,800 छोटे ठेकेदारों का पूरा भुगतान।
डामर की कीमतों में बढ़ोतरी और GST भुगतान प्रक्रिया पर राहत की तैयारी।
Maharashtra Contractor Federation: दिवाली के मौके पर महाराष्ट्र के सार्वजनिक निर्माण विभाग के ठेकेदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। राज्य सरकार ने ठेकेदारों के लंबे समय से अटके भुगतान को प्राथमिकता से देने का भरोसा दिया है।
अब तक करीब 9,700 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि शेष भुगतान के लिए वित्त विभाग से अतिरिक्त निधि मांगी गई है। राशि मिलते ही बाकी बकाया भी चुकाया जाएगा। यह जानकारी सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंह राजे भोसले ने दी।
मंत्रालय में महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ और राज्य अभियंता संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में भुगतान सहित विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। इस दौरान मंत्री भोसले ने बताया कि एक करोड़ रुपए से कम लागत वाले छोटे निर्माण कार्य करने वाले करीब 4,800 ठेकेदारों का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है।
उपलब्ध निधि का तत्काल वितरण कर अन्य लंबित बिलों का भुगतान भी प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए हैं। इमारतों की मरम्मत के कामों का बकाया चुकाने के लिए वित्त विभाग से निधि मांगी गई है। राशि मिलते ही भुगतान किया जाएगा।
बैठक में डामर की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठा। मंत्री शिवेंद्रसिंह राजे भोसले ने बताया कि इस संबंध में एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। निर्माण सामग्री महंगी होने से यदि सड़क निर्माण की लागत बढ़ती है, तो मंजूर बजट के भीतर सड़क की लंबाई या काम का दायरा घटाने का प्रावधान किया जाएगा। विद्युत संबंधी निर्माण कार्यों की दर सूची अंतिम चरण में है, जबकि अन्य निर्माण कार्यों की दर सूची तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।
ठेकेदारों को भुगतान करते समय GST जमा करने की संशोधित प्रक्रिया के कारण आ रही परेशानियों पर भी चर्चा हुई। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने वित्त विभाग से पहले की व्यवस्था फिर से लागू करने का अनुरोध किया है। इस मुद्दे पर वित्त विभाग के साथ अलग से बैठक कर नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि भुगतान लंबित होने पर भी पूरे किए गए काम पंजीकरण नवीनीकरण में मान्य होंगे। ठेकेदारों को पंजीकरण अवधि बढ़ाने की भी राहत मिलेगी।
सुशिक्षित बेरोजगार अभियंताओं के लिए सरकारी नियमों के तहत आरक्षित निर्माण कार्यों का आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा। सभी जिलों में इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।