महाराष्ट्र निसर्ग उद्यान  (सोर्सः सोशल मीडिया)
मुंबई

मुंबई का महाराष्ट्र निसर्ग उद्यान बना प्रकृति का खजाना, 85 प्रजातियों की तितलियां और 125 तरह के पक्षी

Mumbai Nisarg Udyan: मुंबई के मीठी नदी के मुहाने पर कभी कचरा फेंकने के लिए इस्तेमाल होने वाला डंपिंग ग्राउंड आज महाराष्ट्र निसर्ग उद्यान के रूप में हरियाली और जैव विविधता का अनूठा केंद्र बन गया है।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • कभी कचरा डंपिंग ग्राउंड रहा महाराष्ट्र निसर्ग उद्यान आज 14 हजार से अधिक पेड़-पौधों से हरा-भरा जंगल बन चुका है।

  • उद्यान में ब्लू मॉर्मन, कॉमन क्रो और प्लेन टाइगर समेत तितलियों की 85 प्रजातियां मौजूद हैं।

  • पक्षियों की 125 प्रजातियों को यहां सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण मिला है।

Mumbai Nature Park: कंक्रीट के जंगल में तब्दील होते हुए इस शहर में एमएमआरडीए का महाराष्ट्र निसर्ग उद्यान इंसानी इच्छाशक्ति और प्रकृति की वापसी का सबसे बड़ा सबूत है। जिस जमीन पर कभी शहर भर का कचरा फेंका जाता था, आज वहां परिंदों की चहचहाहट और तितलियों के रंगीन पंख लहरा रहे हैं।

मीठी नदी के मुहाने पर बंजर डंपिंग ग्राउंड पर बनाया गया यह मानव निर्मित जंगल आज 14 हजार पेड़ों से पर्यावरण का सुरक्षा कवच साबित हो रहा है।

रंग-बिरंगी तितलियों का अनूठा संसार

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, उद्यान का बटरफ्लाई पार्क किसी रंगीन तिलिस्म से कम नहीं है। यहां ब्लू मॉर्मन, कॉमन क्रो और प्लेन टाइगर जैसी 85 प्रजातियों की तितलियां और 125 किस्म के पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है। शहर में तितलियों की इतनी बड़ी मौजूदगी बेहतर आबोहवा का सबसे ठोस पैमाना है।

नक्षत्र वन में जल संरक्षण पर जोर

पार्क के पास प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान के आधार पर नक्षत्र वन बनाया गया है। 27 नक्षत्रों से जुड़े औषधीय पेड़ों का यह क्षेत्र शहर के तनाव से जूझते लोगों को मानसिक शांति देता है। उद्यान में हरड़, बहेड़ा, आंवला, अर्जुन, नीम और पलाश समेत 14 हजार से अधिक पेड़-पौधे लहलहा रहे हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए 2.5 करोड़ लीटर मानसूनी पानी को संचित कर एक एकड़ में फैला विशाल तालाब प्रवासी जलपक्षियों के लिए सुरक्षित आशियाना भी बन गया है।

हरित क्षेत्र में जैव विविधता के साथ कड़ा अनुशासन का नजारा

यह हरित क्षेत्र देश के कुल पक्षी वर्ग की करीब 10 प्रतिशत आबादी को पनाह दे रहा है। यहां इंडियन पैराडाइज फ्लाईकैचर, कोयल और सनबर्ड जैसे पक्षी स्वच्छंद विचरण करते हैं। जमीन पर भारतीय कोबरा, रसेल वाइपर और अजगर जैसे जीव खाद्य श्रृंखला का संतुलन साधे हुए है।

यह पार्क सुबह 8:30 से दोपहर 3:30 बजे तक ही खुलता है। बीएमसी स्कूलों के छात्रों के लिए प्रवेश शुल्क एक रुपया, आम नागरिकों के लिए 20 रुपए और विदेशियों के लिए 100 रुपए है। परिसर को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त रखा गया है, जहां प्री-वेडिंग शूट, जन्मदिन का जश्न और धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। प्रकृति को करीच से जानने के लिए यहां 300 सीट का आडियो-विजुअल हॉल और एम्फीथिएटर भी है।

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