महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव के लिए प्रचार का शोर थम गया।
राज्य की तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन सीटों पर कुल 182 उम्मीदवार मैदान में हैं।
महायुती और महाविकास आघाड़ी के बीच कांटे की टक्कर में कई बागी उम्मीदवार खेल बिगाड़ सकते हैं।
Maharashtra Graduate Teacher Constituency Election: महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की 5 सीटों के द्विवार्षिक चुनाव के लिए चुनाव प्रचार का शोर अब पूरी तरह से थम चुका है। राज्य की 3 स्नातक और 2 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान आयोजित किया जाएगा, जबकि 27 अक्टूबर को मतों की गिनती होगी।
सत्ताधारी महायुती और विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) दोनों गठबंधनों ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई बना लिया है। कुल 2,419 मतदान केंद्रों पर 10,68,072 मतदाता चुनाव मैदान में उतरे 182 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे।
इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा (महायुती) के उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे और कांग्रेस (MVA) के निवर्तमान एमएलसी जयंत आसगांवकर के बीच माना जा रहा है। शिवसेना से सचिन सानप और निर्दलीय उम्मीदवार दत्तात्रय सावंत भी मैदान में डटे हैं। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, यदि कौस्तुभ गावडे चुनाव जीतते हैं तो वे इस निर्वाचन क्षेत्र के इतिहास में सबसे कम उम्र के विधान पार्षद बनेंगे।
इस सीट पर भाजपा की स्मिता जाधव का मुकाबला एनसीपी (शरद चंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख-जाधव और शिवसेना (यूबीटी) के सुनील मोदी से है।
नागपुर में भाजपा के सुधाकर कोहले की सीधी टक्कर कांग्रेस के निवर्तमान एमएलसी अभिजीत वंजारी से हो रही है, जिन्होंने पिछले चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। वहीं, नितेश कराले निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
अमरावती में मुकाबला काफी दिलचस्प है, जहां कांग्रेस की अदिती पोहरे, शिवसेना यूबीटी के दत्तात्रय लहाने, शिवसेना के निवर्तमान सदस्य किरण सरनाईक और विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ के दिलीप कडू मैदान में हैं। यहाँ शिवसेना के बागी पूर्व विधायक श्रीकांत देशपांडे और भाजपा के बागी नेताओं की वजह से मुकाबला और पेचीदा हो गया है।
इस सीट पर एनसीपी के निवर्तमान एमएलसी सतीश चव्हाण, शिवसेना (यूबीटी) के दिलीप घुगे और एनसीपी (शरद पवार) के प्रतापसिंह पाटिल के बीच संघर्ष देखा जा रहा है।
वर्तमान एमएलसी सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। बागी प्रत्याशियों की मौजूदगी और दोनों प्रमुख गठबंधनों का दांव पर लगा वर्चस्व इस चुनाव को बेहद रोमांचक बना रहा है। अब देखना यह होगा कि 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना में बाजी किसके हाथ लगती है।