सांकेतिक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

महाराष्ट्र में अवैध शराब के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक, हर तहसील में बनेगी हाई पावर कमेटी

Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने अवैध शराब के खिलाफ 'ऑपरेशन क्लीन' शुरू किया है। तहसील स्तर पर हाई-पावर कमेटियों का गठन और दारूबंदी कानून को सख्त बनाने के लिए गृह विभाग ने नए आदेश जारी किए हैं।

गोरक्ष पोफली

Operation Clean Maharashtra: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने राज्य में अवैध शराब और हाथभट्टी के फैलते जाल को पूरी तरह खत्म करने के लिए 'ऑपरेशन क्लीन' का बिगुल फूंक दिया है। जहरीली शराब से होने वाली मौतों और बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने न केवल मौजूदा दारूबंदी कानून को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर निगरानी के लिए एक नई प्रशासनिक व्यवस्था भी लागू की है।

हाई-पावर कमेटी का गठन

गृह विभाग द्वारा जारी नए शासनादेश (GR) के अनुसार, अब राज्य की प्रत्येक तहसील (तालुका) में एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया जाएगा। इस समिति की कमान उपविभागीय दंडाधिकारी (SDM) के हाथों में होगी। इस समिति की संरचना इसे बेहद प्रभावी बनाती है, क्योंकि इसमें पुलिस, राजस्व और आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग और महिला जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।

समिति के प्रमुख सदस्य

  • अध्यक्ष: उपविभागीय दंडाधिकारी (SDM)
  • सदस्य: उपविभागीय पुलिस अधिकारी (DYSP), तहसीलदार, राज्य उत्पादन शुल्क अधिकारी, थाना प्रभारी (PI)।
  • विशेष प्रतिनिधित्व: महिला जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी।

2005 की पुरानी व्यवस्था निरस्त

यह बदलाव छत्रपति संभाजीनगर विभागीय आयुक्त कार्यालय द्वारा गठित अध्ययन समिति की सिफारिशों के बाद किया गया है। सरकार ने वर्ष 2005 से चली आ रही पुरानी समितियों को भंग कर दिया है, जो समय के साथ निष्प्रभावी साबित हो रही थीं। नई व्यवस्था में 'संयुक्त कार्रवाई' (Joint Action) पर जोर दिया गया है ताकि विभागों के बीच तालमेल की कमी का फायदा शराब माफिया न उठा सकें।

अधिकारियों की सीधी जवाबदेही

'ऑपरेशन क्लीन' की सबसे बड़ी विशेषता जवाबदेही तय करना है। प्रत्येक समिति के लिए हर महीने कम से कम एक समीक्षा बैठक करना अनिवार्य होगा। यदि किसी क्षेत्र में अवैध शराब का धंधा चलता पाया गया, तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस महानिदेशक (DGP) और राज्य उत्पादन शुल्क आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थों को तत्काल सक्रिय करें।

महिला सुरक्षा और सामाजिक हित

इस मुहिम में महिला जनप्रतिनिधियों को शामिल करना एक दूरगामी कदम माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के कारण सबसे अधिक प्रताड़ना महिलाओं को झेलनी पड़ती है। अब महिलाएं सीधे प्रशासन को अवैध ठिकानों की जानकारी दे सकेंगी, जिस पर त्वरित छापेमारी की जाएगी। जिलाधिकारी को अधिकार दिया गया है कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पालकमंत्री से चर्चा कर समिति में अतिरिक्त विशेषज्ञों को भी जोड़ सकते हैं।

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