

CORI Robotic Surgical System: घुटनों और कूल्हों के असहनीय दर्द से परेशान मरीजों के लिए चिकित्सा विज्ञान ने एक नई उम्मीद जगाई है। मुंबई के प्रतिष्ठित हिंदुजा अस्पताल ने अत्याधुनिक 'कोरी' (CORI) रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम को अपने बेड़े में शामिल कर जोड़ प्रत्यारोपण (Joint Replacement) के क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति की शुरुआत की है। इस हाईटेक प्रणाली में रोबोटिक तकनीक डॉक्टरों के अनुभव के साथ मिलकर सर्जरी को मिलीमीटर स्तर की सटीकता प्रदान करेगी, जिससे सफलता की दर और भी बढ़ जाएगी।
हिंदुजा अस्पताल प्रशासन ने घोषणा की है कि यह अत्याधुनिक सुविधा अस्पताल के माहिम और खार दोनों केंद्रों पर उपलब्ध होगी। 'स्मिथ एंड नेफ्यू' द्वारा विकसित यह 'हैंडहेल्ड' रोबोटिक प्लेटफॉर्म पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण, आंशिक घुटना प्रत्यारोपण, कूल्हा प्रत्यारोपण और जटिल पुनः जोड़ सर्जरी (Revision Surgery) के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
'कोरी' प्रणाली की सबसे क्रांतिकारी विशेषता यह है कि इसमें सर्जरी से पहले सीटी स्कैन (CT Scan) की आवश्यकता नहीं होती है। इसका सीधा लाभ मरीजों को होता है, क्योंकि वे अनावश्यक रेडिएशन (विकिरण) के प्रभाव से बच जाते हैं। सर्जरी के दौरान यह सिस्टम मरीज के जोड़ की शारीरिक संरचना का 'रियल टाइम' मानचित्र तैयार करता है। इससे सर्जन को यह तय करने में मदद मिलती है कि इम्प्लांट को किस कोण और कितनी गहराई पर लगाना है। यह तकनीक आसपास की स्वस्थ हड्डियों और कोमल ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुँचाए बिना केवल प्रभावित हिस्से पर काम करती है।
अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौतम खन्ना ने बताया कि यह तकनीक मरीजों को विश्वस्तरीय और डेटा-आधारित उपचार देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस तकनीक के उपयोग से मरीजों को कम रक्तस्राव, कम दर्द और बहुत तेज रिकवरी का अनुभव होता है। इसके अलावा, रोबोटिक सटीकता के कारण लगाए गए इम्प्लांट्स की उम्र भी बढ़ जाती है, जिससे वे लंबे समय तक टिकाऊ बने रहते हैं।
अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. संजय अग्रवाल के अनुसार, 'कोरी' प्रणाली सर्जनों की विशेषज्ञता को और अधिक बल देती है। यह डॉक्टरों को सर्जरी के दौरान डिजिटल फीडबैक प्रदान करती है, जिससे मानवीय त्रुटि की संभावना न्यूनतम हो जाती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन बुजुर्ग मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जो पारंपरिक सर्जरी के बाद लंबे रिकवरी समय से डरते हैं।