(प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: सोशल मीडिया)  
मुंबई

कस्टडी में मौत पर सख्ती: फॉरेंसिक जांच, वीडियो पोस्टमार्टम अनिवार्य; 18 माह तक सुरक्षित रहेगा CCTV डेटा

Maharashtra Government News: महाराष्ट्र में कस्टडी में मौतों पर रोक के लिए नए नियम लागू। वीडियो पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच, 18 महीने CCTV डेटा बैकअप और मुआवजे का प्रावधान किया गया।

रूपम सिंह

Maharashtra Custodial Death New Rules: महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस कस्टडी में होने वाली मौतों की निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह जांच सुनिश्चित करने के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब ऐसे प्रत्येक मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाएगी। सरकार का उद्देश्य कस्टोडियल हिंसा और लापरवाही पर प्रभावी रोक लगाना तथा जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

हर मामले में होगी फॉरेंसिक जांच और वीडियो पोस्टमॉर्टम

नई व्यवस्था के तहत पुलिस कस्टडी में मौत होने पर फॉरेंसिक जांच, वीडियो पोस्टमॉर्टम और सभी आवश्यक जैविक नमूनों को सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। पोस्टमॉर्टम तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया जाएगा और इसकी पूरी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि जांच के दौरान किसी भी तरह की अस्पष्टता न रहे।

मुंबई में क्राइम ब्रांच, अन्य जिलों में CID करेगी जांच

सरकार ने जांच एजेंसी की जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है। मुंबई शहर में कस्टोडियल डेथ के मामलों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में यह जिम्मेदारी राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को सौंपी गई है। इसके अलावा, घटना के तुरंत बाद एफआईआर या एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज करना, घटनास्थल को सील करना और 24 घंटे के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देना अनिवार्य होगा।

18 महीने तक सुरक्षित रहेगा CCTV डेटा

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सभी पुलिस स्टेशनों में 24 घंटे सक्रिय नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 18 महीने तक सुरक्षित रखनी होगी। साथ ही पुलिस हिरासत में मौजूद बंदियों का नियमित मेडिकल परीक्षण भी अनिवार्य किया गया है, जिससे किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।

लापरवाही साबित होने पर मिलेगा मुआवजा

सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का भी प्रावधान किया है। यदि जांच में पुलिस की लापरवाही साबित होती है, तो पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं, संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज होने की स्थिति में 1.5 लाख रुपये तक का मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन नए नियमों से पुलिस कार्रवाई में जवाबदेही बढ़ेगी और कस्टोडियल डेथ के मामलों की जांच अधिक निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बन सकेगी।

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