Maharashtra Fiscal Crisis: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी लाडली बहन योजना के चलते सरकारी तिजोरी पर पड़े भारी बोझ और लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे के कारण राज्य सरकार अब खर्चों पर सख्ती करने को मजबूर हो गई है। दिवंगत उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री अजीत पवार के असामयिक निधन के बाद वित्त विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़े वित्तीय निर्णय लेने शुरू कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री के अधीन कार्यरत वित्त विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम चरण में होने वाले खर्चों को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया है। इसके तहत 15 फरवरी 2026 के बाद किसी भी नई खरीद प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जाएगी। सरकार के संज्ञान में यह बात आई है कि कई विभाग वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन महीनों में बड़ी मात्रा में बजट खर्च कर देते हैं। कैश फ्लो बनाए रखने और अनावश्यक व्यय पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
नई खरीदारी पर पाबंदी:
15 फरवरी के बाद फर्नीचर, कंप्यूटर, ज़ेरॉक्स मशीन, अन्य उपकरण, उनके स्पेयर पार्ट्स की मरम्मत, कार्यशालाएं (सेमिनार) तथा कार्यालय किराया जैसे प्रस्तावों को स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
निविदाओं पर रोक:
जिन प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन जिनकी निविदा प्रक्रिया 15 फरवरी तक प्रकाशित नहीं हुई है, उनकी आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, इस तिथि से पहले जारी किए गए टेंडरों की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
अग्रिम खरीद पर प्रतिबंध:
दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की सीमित खरीद की अनुमति रहेगी, लेकिन अगले वित्तीय वर्ष के लिए स्टॉक जमा करने के उद्देश्य से अग्रिम खरीद पर सख्त रोक लगाई गई है।
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