मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व अन्य (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

महाराष्ट्र में 'धर्मांतरण विरोधी' बिल आज विधानसभा में होगा पेश; जानें सख्त सजा और नए नियमों की पूरी डिटेल्स

Maharashtra Anti-Conversion Bill: महाराष्ट्र सरकार आज विधानसभा में 'धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' पेश करेगी। जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए लाए जा रहे इस कानून में जेल और कड़े जुर्माने का प्रावधान है।

आकाश मसने

Maharashtra Freedom of Religion Bill 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। राज्य सरकार आज विधानसभा में 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' पेश करने जा रही है। इस बिल का प्राथमिक उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या लालच देकर कराए जाने वाले धार्मिक धर्मांतरणों पर पूरी तरह से रोक लगाना है।

कैबिनेट की मंजूरी और समिति का गठन

इस प्रस्तावित कानून को 5 मार्च को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई थी। यह निर्णय पुलिस महानिदेशक (DGP) की अध्यक्षता वाली एक उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। इस समिति का गठन 14 फरवरी, 2025 को किया गया था, जिसका काम अवैध धर्मांतरण से जुड़ी शिकायतों से निपटने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना था।

नए कानून के तहत क्या बदल जाएगा?

प्रस्तावित बिल में धर्मांतरण की प्रक्रिया को लेकर बेहद सख्त शर्तें रखी गई हैं।

60 दिन पहले सूचना: यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट को कम से कम 60 दिन पहले इसकी लिखित सूचना देनी होगी।

अनिवार्य पंजीकरण: धर्म परिवर्तन के बाद, इसे कानूनी मान्यता दिलाने के लिए 25 दिनों के भीतर आधिकारिक तौर पर पंजीकृत करवाना अनिवार्य होगा।

शिकायत का अधिकार: यदि किसी व्यक्ति का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है, तो उसके खून के रिश्तेदार (माता-पिता, भाई-बहन आदि) पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सख्त दंड का प्रावधान

बिल में केवल व्यक्तियों ही नहीं, बल्कि उन संगठित संस्थाओं की पहचान करने और उन्हें दंडित करने की प्रक्रिया भी शामिल है जो अवैध धर्मांतरण के पीछे सक्रिय हैं। सरकार का तर्क है कि यह कानून समाज के कमजोर वर्गों को 'कनवर्जन माफिया' के चंगुल से बचाने के लिए आवश्यक है।

अन्य राज्यों की तर्ज पर कदम

महाराष्ट्र अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों की कतार में शामिल हो गया है, जहां पहले से ही 'धर्म की स्वतंत्रता' संबंधी कड़े कानून लागू हैं। भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे सहित कई सत्ताधारी नेता लंबे समय से इस कानून की मांग कर रहे थे। विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित होने और राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद यह बिल कानून का रूप ले लेगा।

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