Maharashtra FDA Commissioner Tukaram Mundhe Action: महाराष्ट्र राज्य में मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज करने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अब अपने ही अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
आयुक्त तुकाराम मुंढे ने विभिन्न जिलों के 12 उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है।
इन अधिकारियों पर कर्तव्य में लापरवाही, कदाचार, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी और न्यायालय को गुमराह करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
नासिक में हाई स्ट्रीट इम्पेक्स एलएलपी और एसओएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पांच अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में आई है। आरोप है कि जब्त की गई ऐसी सुपारी, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थी,
उसे वास्तविक रूप से नष्ट नहीं किया गया। इसके बजाय उसे नष्ट किए जाने से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय में कार्रवाई की गई। मामले में न्यायालय की अवमानना और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बेबी फूड प्रोडक्ट को लेकर कड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत शिशु आहार के भ्रामक विज्ञापनों और फ्री सैंपलिंग के प्रलोभनों पर रोक लगा दी गई है। तुकाराम मुंढे की रडार पर इस बार। वो प्रोडक्ट हैं जिनकी वजह से शिशुओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। बेबी फूड प्रोडक्ट की वजह से ब्रेस्ट फीडिंग का चलन, कमजोर हुआ है।
इसी वजह से अब बेबी फूड प्रोडक्ट और पैकेट वाले दूध की थैली पर 'मां का दूध सबसे बेहतर' लिखना अनिवार्य होगा। दूसरी चेतावनियां जैसे मां का दूध नहीं पिलाने से होने वाले दुष्परिणाम की जानकारी प्रमुखता से देनी होंगी। इसके अलावा फ्री सैंपल, गिफ्ट, कूपन, कैशबैक और दूसरे प्रलोभन पर रोक है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लागू होंगे नियम
टीवी और प्रिंट मीडिया के अलावा वेबसाइट, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से भी प्रतिबंधित प्रचार नहीं किया जा सकेगा। इन कदमों का उद्देश्य शिशु आहार के प्रचार में भ्रामक दावों और अनुचित प्रलोभनों को नियंत्रित करना है।