मंत्री जयकुमार रावल (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

महाराष्ट्र में 8,497 करोड़ की कपास खरीद, क्या फेल हुआ 'कपास किसान' ऐप? मंत्री जयकुमार रावल ने दिया ये जवाब

Maharashtra Cotton Procurement: महाराष्ट्र सरकार ने 8,497 करोड़ की कपास खरीद का आंकड़ा पेश किया है। मंत्री जयकुमार रावल ने 'कपास किसान' ऐप में खराबी और किसानों के शोषण के आरोपों को सिरे से खारिज किया।

आकाश मसने

Jaykumar Rawal On Cotton Procurement: महाराष्ट्र में कपास उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने मौजूदा सत्र के दौरान कपास की खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के भुगतान को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। शुक्रवार को विधानसभा में एक लिखित जवाब के दौरान महाराष्ट्र के मंत्री जयकुमार रावल ने स्पष्ट किया कि राज्य में कपास की खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुचारू रूप से चल रही है।

रिकॉर्ड खरीद और भारी-भरकम भुगतान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 16 फरवरी, 2026 तक राज्य भर में कम से कम 106.99 लाख क्विंटल कपास की खरीद पूरी की जा चुकी है। इस विशाल मात्रा की कुल कीमत 8,497 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो सीधे तौर पर किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण को दर्शाती है। मंत्री रावल ने बताया कि 2025-26 के कपास सत्र के लिए राज्य भर में कुल 168 खरीद केंद्र खोले गए थे, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। अब तक कुल 5,02,598 किसानों ने इन केंद्रों के माध्यम से अपनी फसल बेची है।

'कपास किसान' ऐप और तकनीकी विवाद पर क्या बोले मंत्री

पिछले कुछ समय से विपक्षी खेमों और कुछ क्षेत्रों से यह आरोप लगाए जा रहे थे कि सरकार द्वारा जारी 'कपास किसान' मोबाइल ऐप में तकनीकी खामियां हैं, जिसके कारण किसानों को 'स्लॉट बुकिंग' में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से जनवरी 2026 में जालना जिले से ऐसी शिकायतें सामने आई थीं।

हालांकि, मंत्री जयकुमार रावल ने इन सभी दावों को झूठा और निराधार करार दिया है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि अब तक 72 लाख किसानों ने इस ऐप पर सफलतापूर्वक अपना पंजीकरण करा लिया है, जो ऐप की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस खरीद प्रक्रिया की नोडल एजेंसी, भारतीय कपास निगम (CCI), को तकनीकी मुद्दों से संबंधित कोई भी औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

शोषण के आरोपों का खंडन और गुणवत्ता मानक

खरीद केंद्रों पर किसानों के साथ दुर्व्यवहार या उनके शोषण की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि ऐसे सभी आरोप गलत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कपास की खरीद पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार ही की जा रही है। एमएसपी का लाभ केवल उन किसानों को दिया जा रहा है जिनकी कपास निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करती है। सीसीआई (CCI) जो केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अधीन काम करती है, यह सुनिश्चित कर रही है कि गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता न हो।

इस रिपोर्ट के माध्यम से सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि कपास खरीद का तंत्र पूरी तरह से सक्रिय है और तकनीकी रूप से सक्षम भी है। किसानों को किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है।

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