Owaisi vs Sanjay Nirupam on Conversion Bill: महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti-Conversion Law) के पारित होने के बाद राज्य की सियासत में उबाल आ गया है। विधानसभा में पेश किए गए इस कड़े कानून को मंजूरी मिलने के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। जहाँ राज्य सरकार का तर्क है कि यह कानून जबरन धर्मांतरण और 'लव जिहाद' जैसी प्रथाओं पर लगाम लगाएगा, वहीं एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे निजता के अधिकार का हनन बताया है। ओवैसी के विरोध पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता संजय निरुपम ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अब डरा-धमकाकर या गुमराह कर धर्म परिवर्तन कराने वालों की जगह जेल में होगी।
महाराष्ट्र सरकार के नए कानून के मुताबिक, अब किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरण करने से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य होगा। कानून का उल्लंघन करने पर 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर इस कानून की आलोचना करते हुए इसे उत्तर प्रदेश के कानूनों से भी अधिक कठोर बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून न केवल वास्तविक धर्मांतरण को अपराध की श्रेणी में लाता है, बल्कि अंतरधार्मिक जोड़ों के लिए भी जोखिम पैदा करता है। ओवैसी ने विशेष रूप से 'शिक्षा के माध्यम से ब्रेनवाशिंग' जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति पवित्र ग्रंथ पढ़कर या किसी विद्वान से धर्म के बारे में सीखकर प्रभावित होता है, तो क्या पुलिस उसे 'ब्रेनवाशिंग' मानकर गिरफ्तार कर लेगी? ओवैसी ने इसे बाबासाहेब अंबेडकर की भूमि का अपमान बताया, जिन्होंने स्वेच्छा से लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था।
भाजपा नेता संजय निरुपम ने ओवैसी के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग महाराष्ट्र को 'हरा' करने का सपना देखते हैं, वही इस कानून का विरोध कर रहे हैं। निरुपम ने कहा, "ओवैसी अपने मौलानाओं को समझा दें कि अगर कोई भी मौलाना लव जिहाद या कानून का उल्लंघन कर गुमराह करने की कोशिश करेगा, तो उसे जेल भेजा जाएगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि बाबासाहेब अंबेडकर का धर्मांतरण स्वेच्छा और गौरव का प्रतीक था, लेकिन आज जो धर्मांतरण लालच या दबाव में कराया जा रहा है, वह अपराध है। निरुपम ने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र का रंग हमेशा से 'भगवा' था और भगवा ही रहेगा।
महाराष्ट्र का यह नया कानून कई मायनों में अन्य राज्यों से अलग और सख्त है, धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार भी इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पुलिस को बिना किसी शिकायत के भी स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू करने की अनुमति दी गई है। धर्मांतरण से संबंधित दस्तावेजों का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति को सजा दी जा सकती है। बार-बार कानून का उल्लंघन करने वाले संस्थानों या व्यक्तियों को लंबी कैद का सामना करना होगा।