AI ट्रेनिंग कार्यक्रम में मौजूद अतिथि (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

AI के युग में जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए नया दृष्टिकोण जरूरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव वर्मा ने दी सलाह

AI Training कार्यक्रम में महाराष्ट्र उद्यमिता एवं नवाचार विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने पत्रकारों को तकनीक और नैतिकता के साथ समाचार निर्माण की जिम्मेदारी सिखाने पर जोर दिया।

आकाश मसने

Artificial Intelligence Training Program: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच, पत्रकारिता को इस नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाने और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता है। कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने मंगलवार को कहा कि पत्रकारों को केवल तकनीकी कौशल ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार समाचार निर्माण की एक नई मानसिकता विकसित करने की जरूरत है।

मनीषा वर्मा रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय, मंत्रालय और विधानमंडल वार्ताहर संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम' के उद्घाटन के अवसर पर बोल रही थीं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पत्रकारों को एआई युग के लिए तैयार करना है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव वर्मा ने कहा कि एआई प्रशिक्षण को प्रतिभागियों के अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता के अनुरूप संरचित किया जाना चाहिए। उन्होंने एआई उपकरणों के परिचय के बजाय उनके व्यावहारिक उपयोग सिखाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर के मीडिया संस्थान एआई को अपना रहे हैं और महाराष्ट्र के पत्रकारों को भी इस नए युग को आत्मसात करना होगा। वर्मा ने स्पष्ट किया कि "हमारा लक्ष्य केवल तकनीकी उन्नति नहीं, बल्कि नैतिक पत्रकारिता के मूल्यों के साथ तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करना है।

एआई कंटेंट के इस्तेमाल से पहले पुष्टि जरूरी

सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय के प्रधान सचिव तथा महानिदेशक बृजेश सिंह ने पत्रकारों को एआई द्वारा तैयार सामग्री का उपयोग करने से पहले अनिवार्य रूप से सत्यापन करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'एआई' सत्य का स्रोत नहीं है; यह केवल सूचना का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन सत्य निर्धारित नहीं कर सकता। उन्होंने चेताया कि मानवीय सत्यापन के बिना एआई से प्राप्त संदर्भों पर निष्कर्ष निकालना खतरनाक हो सकता है। साथ ही, उन्होंने पत्रकारों को एआई टूल्स में संवेदनशील या गोपनीय दस्तावेज अपलोड करने से पहले सतर्कता बरतने की सलाह भी दी।

एआई यानी कृत्रिम मस्तिष्क: कुलपति पालकर

रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अपूर्वा पालकर ने एआई को 'कृत्रिम मस्तिष्क' बताया, जो मानव मस्तिष्क की तरह ही 'स्मृति' और 'प्रसंस्करण' का कार्य करता है। लेकिन, उन्होंने इसके इस्तेमाल में मानवीय बुद्धि के हस्तक्षेप को बनाए रखने पर जोर दिया।

डॉ. पालकर ने आगाह किया कि एआई के गलत इस्तेमाल से झूठी खबरें फैल सकती हैं, इसलिए इसके कानूनी और नैतिक पहलुओं की जानकारी होना महत्वपूर्ण है।

एआई प्रतियोगी नहीं, बल्कि सहायक है

एआई विशेषज्ञ किशोर जसमानी ने कहा कि एआई, इंसानों का प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहायक है। उन्होंने बताया कि एआई विशाल और शुद्ध डेटा से ज्ञान प्राप्त करता है और जो लोग एआई को समझेंगे और उसका उपयोग करना सीखेंगे, वे अपने काम में अधिक कुशल और सफल होंगे, क्योंकि आज के अधिकांश डिजिटल प्लेटफॉर्म एआई पर आधारित हैं। इस अवसर पर कई पत्रकार और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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