Maharashtra Drought Water Cut: अल नीनो की वजह से कम बारिश होने के कारण राज्य में सूखे का संकट गहराता जा रहा है। राज्य सरकार ने इस परिस्थिति से निपटने के लिए आगामी 16 अक्टूबर से राज्यभर में 10% पानी कटौती करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में प्रदेश की सभी शहरी निकाय संस्थाओं के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पेयजल को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। निर्णय लिया गया है कि राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीमें बांधों, नदियों और नहरों से बिना इजाजत पानी निकालने को रोकने के लिए गश्त करेंगी।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और गैर-कानूनी पंप और सामान जब्त किया जाएगा। संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग ने जलाशयों में उपलब्ध पानी के हिसाब से जल प्रबंधन की योजना बनाई है।
जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन के अनुसार राज्य में पानी के संसाधन सीमित हैं। संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए 31 अगस्त 2027 तक बांध और इस्तेमाल के हिसाब से पानी की योजना बनाई गई है। लोगों को पीने के पानी की कोई कमी न हो, इसलिए पेयजल को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है।
इवैपोरेशन, सिल्टेशन और बिना इजाजत निकासी को ध्यान में रखते हुए पीने का पानी 31 अगस्त 2027 तक रिजर्व किया जाएगा। भविष्य की अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए हर बांध में 10% अतिरिक्त इमरजेंसी बफर स्टॉक रिजर्व किया जाएगा। यदि बहुत अधिक जरूरत पड़ी तो तकनीकी निरीक्षण के बाद डेड स्टोरेज से भी पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।
सभी मनपा, नगरपालिका, ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि 16 अक्टूबर से 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करें। जल रिसाव रोकने के लिए विशेष मुहिम, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को पूरी क्षमता से कार्यान्वित कर गंदे पानी को शुद्ध कर उसका इस्तेमाल बगीचे, निर्माण कार्य, धुलाई के लिए किया जाए।
पेयजल, जानवरों और चारे की जरूरतें पूरी होने के बाद ही बचा हुआ पानी सिंचाई के लिए दिया जाएगा। सबसे पहले रबी सीजन की धान और चारे की फसलों को मंजूरी दी जाएगी। फिर दूसरी रवी फसलों को पानी दिया जाएगा। यदि पानी बचा तो ही बारहमासी फसलों को दिया जाएगा। पानी बचाने वाले सिंचाई के तरीकों पर जोर दिया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार पहले पेयजल, पशुओं और चारे की जरूरत पूरी की जाएगी। इसके बाद उपलब्ध पानी सिंचाई के लिए दिया जाएगा। रबी सीजन में पहले धान और चारे की फसलों को प्राथमिकता मिलेगी। इसके बाद अन्य रबी फसलों को पानी दिया जाएगा। पानी उपलब्ध रहने पर ही बारहमासी फसलों के लिए सिंचाई की अनुमति दी जाएगी। सरकार ने किसानों से पानी बचाने वाली सिंचाई तकनीकों को अपनाने की अपील की है।