नंदनवन में दिव्यांगों के लिए दिवाली स्नेह मिलन समारोह आयोजित हुआ।
राज्य में स्वतंत्र दिव्यांग मंत्रालय की स्थापना की गई है।
जिला नियोजन समिति के बजट का 1% दिव्यांग कल्याण पर खर्च होगा।
ठाणे के आनंद आश्रम में 1,500 से अधिक दिव्यांगों को सहायक उपकरण दिए गए।
Diwali With Divyang People In Mumbai: दिवाली का असली अर्थ दूसरों के जीवन में खुशियों और उम्मीदों का उजाला फैलाना है। इसी भावना के साथ महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को दिव्यांग भाई-बहनों के साथ दिवाली मनाई।
मुंबई स्थित अपने सरकारी निवास 'नंदनवन' में आयोजित दिवाली स्नेह मिलन समारोह में उपमुख्यमंत्री ने दिव्यांगों के साथ भोजन नाश्ता किया, उन्हें उपहार भेंट करते दिवाली की शुभकामनाएं दीं। इस विशेष आयोजन के दौरान 'नंदनवन' का परिसर खुशियों से सराबोर नजर आया। उपस्थित लोगों ने इसे दिव्यांगों के लिए 'आनंदवन' की संज्ञा दी।
डॉ. श्रीकांत शिंदे फाउंडेशन, शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष, रत्ननिधि चैरिटेबल ट्रस्ट और आरोग्यदूत फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि अपने लोगों के जीवन का अंधेरा दूर कर उनके भीतर आशा और विश्वास का दीप जलाना ही सच्ची दिवाली है।
'नंदनवन' निवास स्थान आम नागरिकों, जरूरतमंदों और दिव्यांग भाई-बहनों का अपना घर है। दिव्यांगों में अद्भुत इच्छाशक्ति और संघर्ष करने की क्षमता है। उनके साथ खड़ा रहना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि आज दिव्यांग भाई-बहनों के साथ दिवाली मनाकर उन्हें वास्तविक संतोष और खुशी मिली है।
दो दिन पहले भी डॉ. श्रीकांत शिंदे फाउंडेशन और शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष के माध्यम से उन सैकड़ों छोटे बच्चों व उनके परिवार के साथ दीवाली मनाई गई जो हृदय व अन्य रोगों से पीड़ित थे, लेकिन डॉ. श्रीकांत शिंदे फाउंडेशन और शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष द्वारा समय पर कराए गए मुफ्त इलाज से पूरी तरह ठीक हो गए।
शिंदे ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की महंगी सर्जरी और कॉक्लियर इम्प्लांट के जरिए सुनने-बोलने में सक्षम हुए बच्चों के परिवारों के साथ भी दिवाली मनाई गई। उन्होंने कहा कि बच्चों और उनके अभिभावकों के चेहरों पर खुशी देखकर विशेष संतोष मिलता है।
दिव्यांगों के कल्याण के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम शिंदे ने बताया कि दिव्यांगों को उनके अधिकार और न्याय दिलाने के लिए राज्य में स्वतंत्र दिव्यांग मंत्रालय की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से अनेक दिव्यांगों को रोजगार मिला है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
इसके अलावा जिला नियोजन समिति के कुल बजट का एक प्रतिशत हिस्सा सीधे दिव्यांगों की कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि ठाणे के टेंभी नाका स्थित आनंद आश्रम में अब तक 1,500 से अधिक दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ-पैर (जयपुर फुट), वॉकर, श्रवण यंत्र और अन्य जरूरी उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। इस पहल को राज्य के सभी जिलों तक पहुंचाने की योजना है।
महाराष्ट्र में सूखे के कारण किसानों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे अगले दिन जालना में किसानों के खेतों पर जाकर उनके साथ दिवाली मनाएंगे। उन्होंने किसानों से हिम्मत नहीं हारने और कोई भी गलत कदम नहीं उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और समाज के लोगों को भी संकट की इस घड़ी में उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। यह राजनीति का नहीं, बल्कि इंसानियत के साथ संकटग्रस्त लोगों के साथ खड़े होने का समय है।