Maharashtra Economic Survey (फोटो क्रेडिट-X) 
मुंबई

महाराष्ट्र आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: 9.32 लाख करोड़ पहुंचा कर्ज फिर भी 7.9% की विकास दर से राज्य देश में अव्वल

Maharashtra Public Debt 9.32 Lakh Crore: महाराष्ट्र का सरकारी कर्ज 2025-26 में ₹9.32 लाख करोड़ होने का अनुमान है, जबकि राज्य की विकास दर 7.9% के साथ राष्ट्रीय औसत से ऊपर बनी हुई है।

अनिल सिंह

Maharashtra Economic Survey: महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने राज्य की आर्थिक सेहत की एक मिली-जुली तस्वीर पेश की है। वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल द्वारा प्रस्तुत इस दस्तावेज के अनुसार, महाराष्ट्र का कुल सार्वजनिक कर्ज (Public Debt) वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 9.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि कर्ज का आंकड़ा बड़ा दिख रहा है, लेकिन राज्य ने 7.9 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक विकास दर का अनुमान लगाकर राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ दिया है। बेहतर जीएसटी संग्रह और बाजार में सकारात्मक माहौल ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बकाया कर्ज पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के 8.39 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 18.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर रहा है। इसके बावजूद, राज्य का कर्ज-जीएसडीपी अनुपात (Debt-to-GSDP Ratio) 17-18 प्रतिशत के दायरे में बना हुआ है, जिसे वित्तीय स्थिरता का सूचक माना जाता है। नॉमिनल जीएसडीपी के मौजूदा कीमतों पर 51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जो देश की कुल जीडीपी में महाराष्ट्र के 14 प्रतिशत के सबसे बड़े योगदान को बरकरार रखता है।

वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय घाटा

बढ़ते कर्ज के बोझ के बावजूद, महाराष्ट्र सरकार ने राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) बनाए रखने में सफलता पाई है। सर्वेक्षण में राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) जीएसडीपी का मात्र 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो एफआरबीएम (FRBM) नियमों द्वारा निर्धारित 3 प्रतिशत की सीमा से काफी नीचे है। वहीं, राजस्व घाटा (Revenue Deficit) भी केवल 0.9 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य सरकार उधार लिए गए धन का उपयोग उत्पादक कार्यों और विकास परियोजनाओं में कर रही है, न कि केवल प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने में।

सेक्टरवार विकास और कृषि की स्थिति

महाराष्ट्र की विकास दर में सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र (Services Sector) का है, जो 9 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र (Industry) 5.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि कृषि और संबद्ध गतिविधियां 3.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं। सरकार ने विकास परियोजनाओं के लिए 93,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कृषि क्षेत्र में खरीफ की बुआई 157.27 लाख हेक्टेयर में हुई है, जिससे अनाज, गन्ना और तिलहन की पैदावार में अच्छी बढ़त की उम्मीद है, हालांकि रबी तिलहन के उत्पादन में 16.2 प्रतिशत की गिरावट की आशंका जताई गई है।

प्रति व्यक्ति आय और राजस्व प्राप्ति

महाराष्ट्र के नागरिकों की आर्थिक समृद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय 3,47,903 रुपये आंकी गई है। यह राष्ट्रीय औसत (2,19,575 रुपये) से काफी अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य की राजस्व प्राप्ति (Revenue Receipt) बढ़कर 5.61 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है, जिसमें करों का योगदान 4.77 लाख करोड़ रुपये होगा। इसके अलावा, 16वें वित्त आयोग के तहत केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी और अनुदान से मिलने वाली राशि भी राज्य की वित्तीय स्थिति को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।

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