ED Action DHFL Loan Fraud Case Mumbai: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुख्यालय जांच इकाई ने मेसर्स दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) और उसके प्रवर्तकों से जुड़े बहु-करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 19 अगस्त को की गई तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य मिले हैं।
यह जांच यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। यूनियन बैंक 17 बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से शिकायतकर्ता था। ED के अनुसार, आरोप है कि कपिल वधावन और धीरज वधावन ने कथित तौर पर बैंकों के साथ षड्यंत्र कर 42,871.42 करोड़ रुपये की ऋण सुविधाओं का दुरुपयोग किया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर खातों में हेरफेर किया। इससे कंसोर्टियम में शामिल ऋणदाताओं को करीब 34,615 करोड़ रुपये की सदोष हानि हुई। मामले में ED धन के कथित लेन-देन और उसके अंतिम उपयोग की जांच कर रही है।
जांच के दौरान ब्रिटेन स्थित 'हर्टमोर हाउस' नाम की संपत्ति का भी पता चला। यह संपत्ति कपिल वधावन की पत्नी वनिता वधावन के नाम बताई गई है। ED के अनुसार, इस संपत्ति पर कथित फर्जी लेन-देन और ऋण करार के माध्यम से भार सृजित किया गया था।
ED के अनुसार, वर्ष 2026 में इस संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि पंजीकृत स्वामी को देने के बजाय मेसर्स अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के बैंक खाते में भेजी गई। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस रकम का इस्तेमाल भारत में मौजूद देनदारी के निपटारे के लिए किया जाना था।
तलाशी अभियान के दौरान ED ने PMLA की धारा 17(1A) के तहत मेसर्स अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के बैंक खाते में मौजूद 5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी करीब 51.75 करोड़ रुपये, को अपराध की आय के रूप में फ्रीज कर दिया। इसके अलावा कई आपत्तिजनक दस्तावेज और अभिलेख भी जब्त किए गए हैं।
ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। एजेंसी कथित ऋण धोखाधड़ी, धन के लेन-देन और विदेशी संपत्तियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।