सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बढ़ी मुश्किलें, आयकर विभाग ने ₹296 करोड़ का भेजा डिमांड नोटिस; क्या है पूरा मामला?

Central Bank of India: बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस आकलन से सहमत नहीं है और आदेश को चुनौती देगा। बैंक ने कहा कि संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
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सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Income Tax Notice to Central Bank of India: सरकारी क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 296.08 करोड़ रुपये का डिमांड नोटिस भेजा है। मंगलवार को एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने यह जानकारी दी है। एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने कहा कि इनकम टैक्स ने डिमांड नोटिस में कथित तौर पर वित्त वर्ष 2024-25 में कम टैक्स भुगतान का आरोप लगाया है। फाइलिंग में बैंक ने बताया कि उसे इनकम टैक्स एक्ट से संबंधित सेक्शन के तहत 28 मार्च, 2026 का मूल्यांकन आदेश प्राप्त हुआ है।

इस आदेश में टैक्स अधिकारियों द्वारा की गई कुछ कटौतियों और अतिरिक्त राशियों का जिक्र है, जिसके कारण यह डिमांड जारी की गई है।बैंक ने कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की मूल्यांकन इकाई द्वारा दिनांक 28 मार्च, 2026 को जारी 296.08 करोड़ रुपये की डिमांड इनकम टैक्स पोर्टल पर अपलोड की गई थी, जिसे बैंक ने 30 मार्च, 2026 को देखा।

आयकर विभाग के आदेश को चुनौती देगा बैंक

बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस आकलन से सहमत नहीं है और आदेश को चुनौती देगा। बैंक ने कहा कि संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएगी। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपने रुख पर भरोसा जताते हुए कहा कि उसके पास मांग का विरोध करने के लिए ठोस तथ्यात्मक और कानूनी आधार हैं। इसी तरह के मामलों में अपीलीय अधिकारियों के पिछले निर्णयों के आधार पर, बैंक को इस मामले में राहत मिलने की उम्मीद है। बैंक ने कहा कि बैंक निर्धारित समय सीमा के भीतर उपरोक्त आदेश में की गई अस्वीकृतियों/अतिरिक्तियों के विरुद्ध उचित फोरम में अपील दायर करने की प्रक्रिया में है।

सेंट्रल बैंक के पास क्या विकल्प?

बैंक ने आगे कहा कि अपीलीय अधिकारियों के पूर्व निर्णयों/आदेशों को देखते हुए, बैंक का मानना ​​है कि उसके पास इस मामले में अपनी स्थिति को उचित रूप से साबित करने के लिए पर्याप्त तथ्यात्मक और कानूनी आधार हैं और अपेक्षित राहत को ध्यान में रखते हुए, बैंक को उम्मीद है कि पूरी मांग खारिज हो जाएगी।

बैंक के परिचालन पर कोई असर नहीं

बैंक ने यह भी कहा कि उसे मांग नोटिस के कारण किसी भी वित्तीय या परिचालन संबंधी प्रभाव की उम्मीद नहीं है। उसका मानना ​​है कि अपील प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामला उसके पक्ष में सुलझ जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने कहा कि इससे बैंक की वित्तीय, परिचालन या अन्य गतिविधियों पर कोई प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है।

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