देवेंद्र फडणवीस और सुप्रिया सुले (सोर्स-सोशल मीडिया)
मुंबई

शिंदे की है शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी! सुप्रिया सुले के बयान पर देवेंद्र फडणवीस का पलटवार

Devendra Fadnavis On Supriya Sule Shiv Sena NCP Statement: सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच देवेंद्र फडणवीस बोले- जनता 2024 में ही तय कर चुकी है कि पार्टी शिंदे और अजित की है।

अनिल सिंह

Devendra Fadnavis Shiv Sena Statement: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार की लड़ाई में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। शिवसेना के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में लगातार चल रही सुनवाई के बीच नेताओं के तीखे बयान सामने आ रहे हैं।

उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में आक्रामक दलीलें पेश किए जाने के बाद, सुप्रिया सुले ने शिवसेना को लेकर बयान दिया कि शिवसेना ठाकरे की थी, है और आगे भी रहेगी। जिसपर अब देवेंद्र फडणवीस का पलटवार सामने आया है, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यद्यपि मामला न्यायप्रविष्ट है, लेकिन जनता की अदालत पहले ही अपना जनादेश दे चुकी है। शिवसेना शिंदे की और एनसीपी अजित पावर की है।

जनता की अदालत दे चुकी है फैसला

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि शिवसेना और एनसीपी पर अधिकार का विषय कानूनी रूप से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है और देश की शीर्ष अदालत इस पर अंतिम निर्णय लेगी।

उन्होंने कहा, "कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनावों के माध्यम से 'लोक न्यायालय' (जनता की अदालत) ने स्पष्ट मुहर लगा दी है कि असली शिवसेना एकनाथ शिंदे की है और असली एनसीपी अजित पवार की है। हमें पूरा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी जनता के इसी स्पष्ट जनादेश के अनुरूप ही आएगा।"

हिम्मत थी तो राज ठाकरे जैसा साहस दिखाते

दूसरी तरफ, शरद पवार गुट (NCP-SP) की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने देवेंद्र फडणवीस और सत्ताधारी गठबंधन पर करारा हमला बोला। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शिवसेना बीते कल भी उद्धव ठाकरे की थी, आज भी है और आने वाले कल में भी उन्हीं की रहेगी; ठीक यही बात शरद पवार की एनसीपी पर भी लागू होती है।

सुप्रिया सुले ने शिंदे और अजित पवार को घेरते हुए कहा, "यदि उनमें राजनीतिक साहस होता, तो वे राज ठाकरे की तरह अपनी अलग पार्टी और मंच खड़ा करते। दूसरों से बनी-बनाई पार्टी और सिंबल छीनने के बजाय खुद के दम पर संगठन खड़ा करने वालों का ही लोकतंत्र में सम्मान होता है।"

सुप्रीम कोर्ट में क्या चल रहा है?

उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग द्वारा शिवसेना का नाम व 'धनुष-बाण' का चिन्ह एकनाथ शिंदे गुट को और एनसीपी का नाम व 'घड़ी' का चिन्ह अजित पवार गुट को सौंपे जाने के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

ठाकरे गुट की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र और अयोग्यता की धाराओं पर लगातार 5 दिनों तक मैराथन दलीलें दी हैं। अब पूरा महाराष्ट्र और देश शीर्ष अदालत के आने वाले अंतिम फैसले पर अपनी नजरें टिकाए हुए है।

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