हितेंद्र ठाकुर और एकनाथ शिंदे (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

प्रहार जनशक्ति के बाद BVA का Shiv Sena में होगा विलय, हितेंद्र ठाकुर को एकनाथ शिंदे का बड़ा ऑफर, पढ़ें रिपोर्ट

BVA Merger With Shivsena:हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास अघाड़ी (BVA) का उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में हो सकता है विलय। महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित।

अनिल सिंह

Bahujan Vikas Aghadi Shiv Sena Merger: महाराष्ट्र में होने जा रहे विधान परिषद के चुनाव केवल खाली सीटों को भरने का जरिया नहीं हैं, बल्कि यह आगामी मुख्य विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए अपना शक्ति प्रदर्शन करने का सबसे बड़ा मंच बन चुके हैं। 18 जून को होने वाले मतदान से ठीक पहले, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पालघर और ठाणे जिले के राजनीतिक समीकरणों को हमेशा के लिए बदलने की दिशा में एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाया है। कोंकण और पालघर पट्टी के कद्दावर नेता हितेंद्र ठाकुर की पार्टी बहुजन विकास अघाड़ी 'बीवीए' को शिवसेना में शामिल करने के लिए शिंदे ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

शिवसेना के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री शिंदे अपने वोट बैंक को मजबूत करने और ठाणे-पालघर बेल्ट में अपनी एकतरफा बादशाहत कायम करने के लिए यह रणनीति चल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत, यदि हितेंद्र ठाकुर अपनी पार्टी का विलय शिवसेना में करते हैं, तो उनके बेटे और पूर्व विधायक क्षितिज ठाकुर को ठाणे स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद भेजा जाएगा। यह सीट अब तक शिंदे के बेहद करीबी माने जाने वाले रवींद्र फाटक के पास थी, जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है।

ढाई साल का लंबा इंतजार अब होगा खत्म

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के इतिहास में यह पहली बार है जब स्थानीय निकायों (नगर निगमों और जिला परिषदों) के चुनाव समय पर न होने के कारण विधान परिषद की ये 22 में से 17 सीटें पिछले ढाई वर्षों से खाली पड़ी थीं। चुनाव नियमों के अनुसार, यदि किसी स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र में कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों (मतदाताओं) की संख्या 75 प्रतिशत या उससे अधिक हो, तो वहां चुनाव कराए जा सकते हैं। इसी तकनीकी आधार पर चुनाव आयोग ने सोलापुर, अहिल्यानगर, ठाणे, जलगांव, नांदेड़, पुणे और नासिक समेत कुल 17 जिलों में चुनाव कराने का फैसला लिया है।

पिछली बार किस सीट पर किसका था कब्जा?

इस चुनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खाली हुई 17 सीटों में से अधिकांश पर महायुति और महाविकास अघाड़ी के बड़े दिग्गजों का कब्जा था। पिछली बार सोलापुर से प्रशांत परिचारक (भाजपा), अहिल्यानगर से अरुण काका जगताप (NCP), ठाणे से रवींद्र फाटक (शिवसेना), जलगांव से चंदूभाई पटेल (भाजपा), सांगली-सतारा से मोहनराव कदम (कांग्रेस), नांदेड़ से अमर राजुरकर (कांग्रेस), यवतमाल से दुष्यंत चतुर्वेदी (शिवसेना) और नागपुर से चंद्रशेखर बावनकुले (भाजपा) जैसे कद्दावर नेता प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

नामांकन से लेकर नतीजों तक का पूरा शेड्यूल

चुनाव आयोग द्वारा घोषित आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, इस महामुकाबले के लिए 25 मई को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। उम्मीदवार 1 जून तक अपना नामांकन पत्र जमा कर सकते हैं, जबकि 2 जून को पर्चों की जांच की जाएगी। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 4 जून तय की गई है। इसके बाद 18 जून को सुबह से दोपहर तक मतदान होगा और 22 जून को मतों की गिनती के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का यह 'विलय कार्ड' कितना सफल रहा है।

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