तुकाराम मुंढे और बॉम्बे हाईकोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
मुंबई

'मच्छर मारने के लिए तलवार चला रहा FDA', दवा बिक्री रोकने पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, लगाई फटकार

Bombay High Court FDA Cadila Case: कैडिला फार्मा की दवाओं पर बैन लगाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने FDA को फटकारा। FDA ने स्टॉप-सेल ऑर्डर वापस लेने का आश्वासन दिया।

अनिल सिंह

Bombay High Court Slams FDA On Cadila Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा एक प्रमुख दवा निर्माता कंपनी कैडिला फार्मास्युटिकल्स की दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने तथा स्टॉक जब्त करने की कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है।

अदालत ने एफडीए की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा कि प्रशासनिक एजेंसियों को कानून के दायरे में रहकर और न्यायसंगत तरीके से अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि "कानून के क्षेत्र में 'पहले गोली चलाना और बाद में सवाल पूछना' (Shoot first, ask questions later) की नीति नहीं चल सकती।"

कैडिला फार्मास्युटिकल्स क्यों पहुंची थी हाईकोर्ट?

एफडीए ने कैडिला फार्मास्युटिकल्स की कुछ चुनिंदा दवाओं की ब्रांडिंग समान होने और सक्रिय औषधीय घटकों के अलग होने का हवाला देते हुए उनकी बिक्री व वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी।

कंपनी ने इस मनमाने आदेश के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता बिरेन्द्र सराफ के माध्यम से बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र घुघे और जस्टिस गौतम अनखड की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एफडीए के रवैये पर भारी नाराजगी व्यक्त की।

"मच्छर मारने के लिए तलवार चलाने जैसी शक्ति का इस्तेमाल"

सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि एफडीए के पास कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है और उसकी शक्ति 'मच्छर को मारने के लिए तलवार' जैसी है, लेकिन समस्या यह है कि इस शक्ति का प्रदर्शन अत्यधिक कठोरता से किया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने से केवल कंपनी को आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि मरीजों तक दवाओं की पहुंच भी बाधित होती है। लगभग 32 दिनों तक दवाओं का बाजार में न मिलना सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है, इसलिए एफडीए को कार्रवाई करते समय इसके व्यापक सामाजिक प्रभाव का ध्यान रखना चाहिए।

एफडीए का पक्ष और आदेश वापसी का आश्वासन

एफडीए की ओर से सरकारी वकील ने तर्क दिया था कि समान ब्रांडिंग से मरीजों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे गलत दवा ली जाने की आशंका थी। हालांकि, हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद एफडीए ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह कैडिला फार्मास्युटिकल्स के खिलाफ जारी किए गए 'स्टॉप-सेल' (बिक्री रोक) आदेशों को तुरंत वापस लेगा। इसके बाद नियमानुसार पहले कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा, उनका लिखित पक्ष सुना जाएगा और उसके बाद ही कोई विधि सम्मत आदेश पारित किया जाएगा।

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