एंटीलिया बम धमकी मामले में सचिन वाझे की जमानत पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
एनआईए ने जमानत को चुनौती देते हुए आतंकवादी कृत्य का आरोप लगाया।
हाईकोर्ट ने विस्फोटकों की बरामदगी और वाझे से उसके संबंध पर सवाल उठाए।
Bombay High Court Antilia Case: बंबई उच्च न्यायालय ने 2021 के चर्चित एंटीलिया बम धमकी मामले और कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या से जुड़े मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को जमानत दिए जाने के खिलाफ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नील गोखले की पीठ ने शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल किया कि यदि सचिन वाझे को जमानत मिलती है, तो क्या वह दोबारा पुलिस सेवा में शामिल हो सकते हैं? इस पर वाझे के वकील वी. एम. थोराट ने स्पष्ट किया कि सेवा से बर्खास्त किए जाने के कारण उनकी बहाली की संभावना नहीं है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने NIA से यह भी पूछा कि मामले को आतंकवादी कृत्य की श्रेणी में कैसे रखा जा सकता है और जिलेटिन की छड़ों की बरामदगी को सीधे वाझे से किस तरह जोड़ा जा सकता है।
NIA की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने दलील दी कि वाझे ने सार्वजनिक स्थान पर विस्फोटकों से भरी कार खड़ी की थी। एजेंसी के अनुसार, यह कृत्य आतंकवादी गतिविधि के दायरे में आता है।
इससे पहले विशेष अदालत ने सचिन वाझे को जमानत देते हुए कहा था कि NIA गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आतंकवाद का प्रथम दृष्टया मामला साबित करने में विफल रही है। एजेंसी ने इस आदेश को अवैध बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी एक कार मिली थी। इस मामले की जांच के दौरान कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या का मामला भी सामने आया था। सचिन वाझे इन मामलों में आरोपी हैं।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के अंतिम आदेश पर नजर रहेगी।