महाराष्ट्र किसानों को 5,000 की मदद क्रूर मजाक, सांसद सुप्रिया ने प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये देने की मांग की

Supriya Sule Drought Demand: सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख मुआवजा देने की मांग की है। वहीं, रामदास आठवले ने भी ₹5,000 की सहायता को अपर्याप्त बताया।
Offering farmers aid of 5,000 is a cruel joke; MP Supriya demands a payment of 1 lakh rupees per hectare
सुप्रिया सुले सोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • सुप्रिया सुले ने सूखाग्रस्त किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये देने की मांग की।

  • पहले के 4,000 और प्रस्तावित 5,000 रुपये मिलाकर 9,000 रुपये तत्काल देने की अपील।

  • रामदास आठवले ने भी 5,000 रुपये की सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए बढ़ाने की मांग की।

Supriya Sule Ramdas Athawale Drought Relief: राज्य में सूखे की गंभीरता बढ़ने के बीच किसानों को दी जाने वाली 5,000 रुपये की सहायता राशि पर सांसद सुप्रिया सुले ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे किसानों के साथ क्रूर मजाक बताते हुए बीड सहित राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की।

साथ ही, पहले घोषित सहायता के 4 हजार रुपये और अब प्रस्तावित 5,000 रुपये मिलाकर कुल 9,000 रुपये तत्काल किसानों के खातों में जमा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सूखे के मुद्दे पर राजनीति करना उनका उद्देश्य नहीं है लेकिन किसानों को उनका हक मिलना चाहिए।

9,000 रुपये तत्काल दिए जाएं: सुप्रिया सुले

ने कहा कि सूखे के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है। फसल उत्पादन घटने, खेती की लागत बढ़ने और आमदनी प्रभावित होने से किसान आर्थिक संकट में हैं। ऐसे में केवल 5,000 रुपये की सहायता से उनकी समस्याएं हल नहीं होंगी।

सरकार को सूखे की गंभीरता समझते हुए प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की मदद देने पर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पहले घोषित सहायता के 4,000 रुपये किसानों को अब तक नहीं मिले हैं तो उन्हें नई प्रस्तावित सहायता के 5,000 रुपये के साथ जोड़कर कुल 9,000 रुपये तत्काल दिए जाएं। केवल घोषणाएं करने के बजाय

पुरानी रोजगार गारंटी योजना लागू करने की मांग

सुले ने सूखे के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पुरानी रोजगार गारंटी योजना लागू करने की जरूरत भी जताई। उन्होंने कहा कि संकट के समय ग्रामीण नागरिकों को काम उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके, सुप्रिया सुले ने बताया कि सूखाग्रस्त किसानों की सहायता के संबंध में सरकार को 2 पत्र दिए गए हैं लेकिन अब भी निर्णय की प्रतीक्षा है। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय उन्हें राहत दिलाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

किसानों तक वास्तविक सहायता पहुंचाना जरूरी है। बीड सहित राज्य के सूखाग्रस्त इलाकों में फसलों को हुए नुकसान और बढ़ते खर्च ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में सरकारी सहायता की राशि पर्याप्त होने के साथ उसका समय पर वितरण भी अहम है। उन्होंने सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की।

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अल्प सहायता राशि किसानों के लिए अपर्याप्त

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार सूखाग्रस्त किसानों को दिवाली से पहले जो 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने की योजना बना रही है, वह पर्याप्त नहीं है। वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सहायता राशि बढ़ाने का अनुरोध करेंगे, मैं यह देखने की कोशिश करूंगा कि सहायता राशि कैसे बढ़ाई जा सकती है।

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मुझे विश्वास है कि सरकार अच्छी-खासी राशि की घोषणा करेगी। यदि विपक्षी दल चाहते हैं कि चुनाव में ईवीएम की बजाय मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाए तो उन्हें निर्वाचन आयोग को इसके लिए राजी करना चाहिए। दिल्ली में 'इंडिया' और सीजेपी के जारी प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए आठवले ने कहा कि इन प्रदर्शनों से राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों को परेशानी हो रही है।

राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के जिम्मेदार पद पर है और उन्हें समझना चाहिए कि विपक्षी दलों को भी देश को आगे ले जाने की जरूरत है। रोजाना होने वाले प्रदर्शनों से दिल्ली के लोगों को परेशानी होती है और वे इसकी शिकायत कर रहे हैं।

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