Abu Salem Parole Update (फोटो क्रेडिट-X) 
मुंबई

Abu Salem Parole: अबू सलेम को नहीं मिली पैरोल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस वजह से खारिज की याचिका

Abu Salem Parole: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गैंगस्टर अबू सलेम की 4 दिन की पैरोल याचिका खारिज कर दी है। सलेम ने 17.60 लाख रुपये का पुलिस एस्कॉर्ट शुल्क देने से मना कर दिया था।

अनिल सिंह

Mumbai Underworld News: मुंबई की चर्चित टाडा (TADA) अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने सलेम की चार दिनों की पैरोल याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह पुलिस एस्कॉर्ट के लिए निर्धारित सुरक्षा शुल्क देने में असमर्थ है। सलेम ने अपने बड़े भाई के निधन के बाद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ स्थित अपने पैतृक गांव जाने के लिए पैरोल की गुहार लगाई थी। वर्तमान में नासिक सेंट्रल जेल की हाई-सिक्योरिटी बैरक में बंद सलेम ने भारी-भरकम सुरक्षा खर्च वहन करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अदालत ने उसकी अर्जी ठुकरा दी।

अबू सलेम को 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों और बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है। साल 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद से वह भारत की जेल में है और पुर्तगाल के साथ हुए समझौते के अनुसार उसकी अधिकतम 25 साल की सजा 2030 में पूरी होने वाली है।

एस्कॉर्ट राशि बनी पैरोल में रोड़ा

अबू सलेम का पैतृक निवास उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के सरायमीर गांव के पठानटोला मोहल्ले में स्थित है। मुंबई से आजमगढ़ तक की लंबी दूरी और सलेम के 'हाई-प्रोफाइल' क्रिमिनल रिकॉर्ड को देखते हुए पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए 17.60 लाख रुपये के एस्कॉर्ट शुल्क की मांग की थी। सलेम की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि वह इतनी बड़ी राशि का भुगतान करने में सक्षम नहीं है। हालांकि, सुरक्षा नियमों और जेल मैनुअल के अनुसार, खतरनाक कैदियों की बाहरी यात्रा का खर्च उन्हीं को वहन करना होता है, जिसे पूरा न करने पर कोर्ट ने पैरोल देने से मना कर दिया।

पुर्तगाल से प्रत्यर्पण और 2030 की रिहाई

अबू सलेम के मामले में अंतरराष्ट्रीय संधियां काफी महत्वपूर्ण रही हैं। उसे 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था। भारत सरकार ने पुर्तगाल सरकार को यह गारंटी दी थी कि सलेम को 25 साल से अधिक की सजा नहीं दी जाएगी और न ही उसे फांसी दी जाएगी। इसी वादे के कारण सलेम की रिहाई साल 2030 में संभावित है। 2024 में सुरक्षा कारणों से उसे नवी मुंबई की तलोजा जेल से नासिक सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया था, जहाँ उसकी सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।

आजमगढ़ से अंडरवर्ल्ड तक का सफर

अबू सलेम का जन्म आजमगढ़ में हुआ था, जहाँ उसके पिता एक वकील थे। पिता की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद सलेम रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली और फिर मुंबई पहुँचा। मुंबई में वह दाऊद इब्राहिम के संपर्क में आया और धीरे-धीरे अंडरवर्ल्ड में अपनी धाक जमा ली। संगीतकार गुलशन कुमार की हत्या और बॉलीवुड सितारों से जबरन वसूली जैसे मामलों में उसका नाम प्रमुखता से आया। अपने भाई की मौत के बाद वह अपने घर पठानटोला जाना चाहता था, लेकिन सुरक्षा के कड़े नियमों और आर्थिक असमर्थता ने उसकी अंतिम विदाई में शामिल होने की योजना पर पानी फेर दिया।

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