बांद्रा फुटबॉल मैदान विवाद  सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

बांद्रा फुटबॉल मैदान विवाद: BMC के फैसले पर हाईकोर्ट सख्त, कन्वेंशन सेंटर प्रस्ताव पर रोक लगाने का दिया आदेश

Bombay High Court BMC Warning: बांद्रा के नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान को कन्वेंशन सेंटर बनाने के फैसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाई और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

रूपम सिंह

Bandra Football Ground Dispute: बॉम्बे हाई कोर्ट बांद्रा के नेविल डिसूजा फुटबाल मैदान के आरक्षण में बदलाव कर उसे कन्वेंशन सेंटर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बीएमसी के फैसले पर बृहस्पतिवार को नाखुशी जाहिर की। अदालत ने खास तौर पर इस बात को लेकर नाराजगी जताई कि बीएमसी ने फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई होने तक यथास्थिति बनाए रखने का आश्वासन दिया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ ने कहा कि जब अधिकारी अदालत को मौखिक आश्वासन देते हैं और फिर उसके उलट कोई फैसला लिया जाता है, तो कानून की गरिमा दांव पर लग जाती है। पीठ ने बीएमसी को आदेश दिया कि वह बांद्रा रिक्लेमेशन स्थित नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान को खेल के मैदान से प्रदर्शनी केंद्र में तब्दील करने के अपनी आम सभा के फैसले पर आगे कोई कदम न उठाए।

मुंबई फुटबॉल संघ (एमएफए) ने आरक्षण में बदलाव के बीएमसी के प्रस्ताव को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। एमएफए की याचिका पर 10 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान बीएमसी ने हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा था। उसने अदालत को मौखिक रूप से आश्वासन दिया था कि मामले में यथास्थिति बनाए रखी जाएगी और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।

BMC ने आरक्षण में बदलाव के प्रस्ताव को दी मंजूरी

हालांकि, बीएमसी की आम सभा ने मंगलवार (18 अगस्त) को मैदान के आरक्षण में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। जब अदालत ने बृहस्पतिवार को नगर निकाय से सवाल किया कि मौखिक आश्वासन दिए जाने के बावजूद ऐसा फैसला कैसे लिया गया, तो बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश गोड़बोले ने कहा कि आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को अदालत में दिए गए आश्वासन की जानकारी नहीं थी।

लोग अब फुटबॉल कहां खेलेंगे ?

पीठ ने इस पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा, यहां कानून की गरिमा दांव पर है। अगर अधिकारी इस तरह का रवैया दिखाएंगे, तो यह अपने आप में एक समस्या है। उच्च न्यायालय ने बीएमसी के सवाल किया कि लोग अब फुटबॉल कहां खेलेंगे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कुछ जगहों को खुला छोड़ना होगा।

वरना हमारी अगली पीढ़ी यह भूल जाएगी कि खुले मैदान में खेले जाने वाले खेल क्या होते हैं। पीठ ने बीएमसी को मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई सितंबर के लिए निर्धारित कर दी।

फोर्ट इलाके में कचरा वाहन खड़े नहीं होंगे

मुंबई बीएमसी ने बंबई उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि वह शहर के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय फोर्ट इलाके में विरासत स्थलों के पास कचरा ढोने वाले वाहनों की पार्किंग पर रोक लगाएगी।

उच्च न्यायालय द्वारा अपने पूर्व के आदेश के उल्लंघन पर चिंता जताए जाने के बाद नगर निकाय ने बुधवार को एक हलफनामा दाखिल किया और कहा कि वह "अदालत द्वारा जारी सभी निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए प्रतिबद्ध" है।

हलफनामे में कहा गया, "फोर्ट इलाके में शहर की दीवानी अदालत, मुंबई विश्वविद्यालय, बंबई उच्च न्यायालय जैसे विरासत स्थलों के समीप कचरा परिवहन वाहनों की गतिविधियों और उनकी पार्किंग पर रोक लगाने संबंधी इस अदालत के आदेशों का अब से सख्ती से पालन किया जाएगा।" बीएमसी ने कहा कि भविष्य में इन वाहनों को वहां खड़ा नहीं किया जाएगा।

न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हलफनामे में दिए गए आश्वासन और बयानों को स्वीकार कर लिया।

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