जीशान सिद्दीकी (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
मुंबई

जीशान सिद्दीकी सुरक्षा विवाद, Bombay High Court ने राज्य सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

Zeeshan Siddique Security: बॉम्बे हाई कोर्ट ने विधायक जीशान सिद्दीकी की वाई-प्लस सुरक्षा घटाने को संदिग्ध करार देते हुए सरकार से पूछा कि बिना थ्रेट कमेटी समीक्षा के यह निर्णय कैसे लिया गया।

अपूर्वा नायक

Mumbai News In Hindi: बॉम्बे हाई कोर्ट ने बाबा सिद्दीकी के बेटे और विधायक जीशान सिद्दीकी की वाई-प्लस सुरक्षा कम किए जाने पर राज्य सरकार को कठोर शब्दों में घेरा है। अदालत ने प्रारंभिक अवलोकन में कहा कि सुरक्षा में की गई यह कटौती “प्रथम दृष्टया गलत नीयत से प्रेरित” लगती है।

अदालत ने सरकार से पूछा कि इस निर्णय का आधार क्या था और किन रिपोर्टों या मूल्यांकन के आधार पर सुरक्षा स्तर कम किया गया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कई गंभीर प्रश्न उठाए। सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि सुरक्षा मूल्यांकन के लिए गठित थ्रेट पर्सेप्शन कमेटी की बैठक ही नहीं हुई।

अदालत ने जब समिति के रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा तो सरकारी वकील ने स्वीकार किया कि बैठक आयोजित नहीं की गई थी। इस खुलासे पर कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि समिति की समीक्षा के बिना सुरक्षा में कटौती की प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाया गया।

देना होगा स्पष्ट स्पष्टीकरण

हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि सुरक्षा कम करने की पूरी प्रक्रिया में गंभीर खामियां दिखाई देती हैं और राज्य सरकार को इसका स्पष्ट स्पष्टीकरण देना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक सरकार यह नहीं बताती कि कौन-सी रिपोर्ट या एजेंसी इनपुट सुरक्षा घटाने के पक्ष में थे, तब तक निर्णय उचित नहीं माना जा सकता।

वाई-प्लस सुरक्षा में कटौती

सुनवाई के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि बाबा सिद्दीकी की हत्या के प्रयास की जांच के लिए सिद्दीकी परिवार ने एसआईटी गठित करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि यह याचिका दाखिल होने के तुरंत बाद ही जीशान सिद्दीकी की वाई-प्लस सुरक्षा में कटौती कर दी गई। इस क्रम ने अदालत का ध्यान और आकर्षित किया, जिससे गंभीर सवाल उठे कि सुरक्षा घटाने का निर्णय कहीं किसी अन्य कारण से तो प्रभावित नहीं हुआ।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा संबंधी मामलों में नियमबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, क्योंकि किसी भी जनप्रतिनिधि की सुरक्षा से छेड़छाड़ सीधे उनके जीवन और कर्तव्यों को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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