बॉम्बे हाईकोर्ट  फोटो सोर्स-सोशल मीडिया
मुंबई

बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी: POP मूर्तियों पर सुनवाई का मकसद धर्म में हस्तक्षेप नहीं, जल स्रोतों की सुरक्षा

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने POP मूर्तियों पर कहा कि सुनवाई का मकसद धार्मिक परंपरा में हस्तक्षेप नहीं, बल्कि जल स्रोतों की सुरक्षा है। याचिकाकर्ता से वैज्ञानिक प्रमाण मांगे गए।

रूपम सिंह

Bombay High Court POP Statues Ban: मुंबई हाई कोर्ट ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों के उपयोग को लेकर चल रही सुनवाई में स्पष्ट किया है कि अदालत का उद्देश्य किसी धार्मिक परंपरा में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अदालत ने पीओपी के उपयोग का समर्थन करने वाली अखिल सार्वजनिक उत्सव समिति को निर्देश दिया कि यदि वह पीओपी को सुरक्षित मानती है तो इसके समर्थन में वैज्ञानिक आधार प्रस्तुत करे।

प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन पर जताई चिंता

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने कहा कि मूर्तिकारों को पीओपी की मूर्तियां बनाने या बेचने से नहीं रोका गया है। हालांकि, अदालत की चिंता केवल इस बात को लेकर है कि ऐसी मूर्तियों का प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन पर्यावरण पर क्या प्रभाव डालता है। अदालत ने दोहराया कि उसका रुख केवल प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण तक सीमित है।

गणेश मंडलों ने उठाए वैज्ञानिक आधार के सवाल

गणेश मंडलों की ओर से अधिवक्ता उदय वरुजीकर ने अदालत में दलील दी कि अब तक ऐसा कोई निर्णायक वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध नहीं कराया गया है, जो पीओपी को पर्यावरण के लिए हानिकारक साबित करता हो।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से 2021 के बीच विभिन्न न्यायालयों के फैसलों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की वर्ष 2020 की गाइडलाइन में पीओपी का उल्लेख अवश्य है, लेकिन वे भी किसी ठोस वैज्ञानिक शोध पर आधारित नहीं हैं।

धार्मिक परंपरा का भी दिया गया हवाला

याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के अयोध्या फैसले का भी उल्लेख किया गया। उनका कहना था कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

अदालत ने रखा अपना स्पष्ट पक्ष

इन दलीलों पर मुंबई हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह धार्मिक मान्यताओं या पूजा-पद्धति पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। अदालत केवल पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विचार कर रही है। साथ ही, पीओपी के पक्ष में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध कराने के निर्देश देकर अदालत ने यह संकेत दिया कि आगे की सुनवाई तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

मानसून सत्र में नहीं थम रहा गतिरोध, प्रश्नकाल और शून्यकाल चढ़े हंगामें की भेंट, सभापति की अपील रही बेअसर

आज की ताजा खबर 10 अगस्त LIVE: रांची में पुलिस के सामने राष्ट्रगान गाने लगे छात्र; पुलिस ने किया लाठीचार्ज

6 बागी सांसदों के शिवसेना में प्रवेश पर लगेगी रोक या मिलेगा अधिकार? सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट से मांगा जवाब

JPSC के पूर्व चेयरमेन गिरफ्तार, छात्र आंदोलन के बाद CID का बड़ा एक्शन, छापे के बाद दिया था इस्तीफा

राहुल गांधी कुछ नहीं करेंगे, आओ न डरो मत! पीएम मोदी पर संजय राउत ने साधा निशाना