BMC To Cancel 20000 Fake Birth Certificates: मुंबई महानगरपालिका ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सुरक्षा की दिशा में एक कड़ा निर्णय लिया है। मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि महानगरपालिका शहर में सक्रिय बोगस यानी फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों के एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने जा रही है। मेयर के अनुसार, यह निर्णय मुंबई की सुरक्षा और नागरिक डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
इस पूरे मामले का पर्दाफाश करने में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मेयर रितु तावड़े ने बताया कि किरीट सोमैया पिछले 4 से 6 महीनों से इस गंभीर विषय पर लगातार काम कर रहे थे। उनके द्वारा की गई गहन छानबीन और प्राप्त सबूतों के आधार पर ही प्रशासन इस निष्कर्ष पर पहुँचा है। सोमैया ने लगभग 90,000 संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों की पहचान की थी, जिनके बारे में आशंका जताई गई थी कि वे अवैध तरीके से तैयार किए गए हैं।
मेयर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, चिन्हित किए गए 90,000 संदिग्ध दस्तावेजों में से प्राथमिक जांच के बाद 19,734 जन्म प्रमाण पत्रों को पूरी तरह से फर्जी पाया गया है। बीएमसी अब इन सभी 19,734 फर्जी प्रमाणपत्रों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। मेयर ने इसे प्रशासन की एक बहुत बड़ी उपलब्धि करार दिया है क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेजों का रद्द होना एक मिसाल है।
मेयर रितु तावड़े ने इस निर्णय की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा कि ये फर्जी प्रमाणपत्र केवल कागज के टुकड़े नहीं थे, बल्कि इनका उपयोग कई तरह की अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। ऑन पेपर फर्जी पहचान बनाकर लोग शहर में रह रहे थे और सरकारी सुविधाओं का गलत तरीके से लाभ उठा रहे थे। मेयर के अनुसार, इस कार्रवाई से उन लोगों पर लगाम लगेगी जो फर्जी पहचान के सहारे व्यवस्था को चूना लगा रहे थे।
यह भी पढ़ें: ‘सिर्फ गुजराती-मारवाड़ी ही करें अप्लाई…’ मुंबई में 25 लाख के जॉब ऑफर पर मचा बवाल, भड़के रोहित पवार
यह कार्रवाई न केवल बीएमसी की सतर्कता को दर्शाती है बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि सरकारी दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि 19,734 प्रमाणपत्र रद्द किए जा रहे हैं, लेकिन शेष संदिग्ध दस्तावेजों की जांच अभी भी जारी रहने की संभावना है। मेयर रितु तावड़े का यह साहसी कदम मुंबई की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों को बनाने में किन विभागीय कर्मचारियों या बाहरी बिचौलियों का हाथ था, ताकि इस रैकेट की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ा जा सके।