बीएमसी अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

मुंबई में अवैध निर्माणों पर BMC की कार्रवाई की खुली पोल, 10 साल में 2.14 लाख शिकायतें; सिर्फ 6.15% पर तोड़फोड़

Mumbai Illegal Construction: बीएमसी की आरईटीएमएस ऑनलाइन प्रणाली पर 10 वर्षों में अवैध निर्माण की 2,14,917 शिकायतें आईं, पर तोड़क कार्रवाई सिर्फ 13,211 (6.15%) मामलों में हुई। आरटीआई में हुआ खुलासा।

रूपम सिंह

Highlights

  • 10 साल में BMC को अवैध निर्माणों की 2.14 लाख शिकायतें मिलीं।

  • सिर्फ 13,211 मामलों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी हुई।

  • 1.16 लाख शिकायतें डुप्लीकेट घोषित की गईं।

  • एल विभाग में सबसे ज्यादा 30,935 शिकायतें दर्ज हुईं।

BMC RETMS System Illegal Construction: मुंबई शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बीएमसी की ऑनलाइन शिकायत प्रणाली कितनी प्रभावी है, इसका खुलासा आरटीआई के तहत मिली जानकारी से हुआ है। पिछले 10 वर्षों में बीएमसी की आरईटीएमएस प्रणाली पर अवैध निर्माणों से संबंधित 2,14,917 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन इनमें से केवल 13,211 मामलों में ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी की गई।

यह कुल शिकायतों का महज 6।15 प्रतिशत है। इससे अवैध निर्माणों के खिलाफ मनपा की कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीएमसी ने 1 मार्च 2016 को नागरिकों को अवैध निर्माणों की शिकायत दर्ज कराने के लिए आरईटीएमएस ऑनलाइन प्रणाली शुरू की थी।

आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने पूर्वी उपनगर के अतिक्रमण एवं निष्कासन विभाग से इस संबंध में जानकारी मांगी थी। 26 अक्टूबर 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, कुल 2,14,917 शिकायतों में से 1,16,228 को डुप्लीकेट घोषित किया गया। इस तरह वास्तविक शिकायतों की संख्या 98,689 रह गई।

आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई महानगरपालिका ने 60,332 नोटिस तैयार किए, जिनमें से 57,521 जारी किए गए। वहीं, 31,486 मामलों में कारण बताओ आदेश जारी हुए और 29,916 मामलों में ध्वस्तीकरण आवश्यक बताया गया। इसके बावजूद केवल 13,211 मामलों में तोड़क कार्रवाई पूरी हुई। इसके अलावा 15,318 मामलों में ध्वस्तीकरण की व्यवस्था करना बाकी था, जबकि 13,734 शिकायतें बंद होने की प्रतीक्षा में थीं।

एल विभाग में अधिक शिकायत

शिकायतों के मामले में एल विभाग सबसे आगे रहा। यहां 30.935 शिकायतों के मुकाबले केवल 637 ध्वस्तीकरण किए गए। के/पूर्व विभाग में 24,064 शिकायतों पर 1,325, एम/पूर्व में 14,510 शिकायतों पर महज 159, पी/दक्षिण में 14,424 शिकायतों पर 1,932 और के/पश्चिम विभाग में 11,433 शिकायतों पर 1,683 मामलों में कार्रवाई हुई।

आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते है, लेकिन जमीनी स्तर पर परिणाम संतोषजनक नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि 1.16 लाख शिकायतों को डुप्लीकेट घोषित करने के क्या मानदंड अपनाए गए। बोरीवली पूर्व के बेस्ट बस डिपो के लिए आरक्षित भूखंड पर अवैध निर्माणों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए उन्होंने प्रशासन की सक्रियता पर सवाल उठाए है।

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