BMC PAP Housing Project: मुंबई में परियोजना प्रभावित लोगों के पुनर्वास व पुनर्स्थापन के लिए बड़े पैमाने पर आवास तैयार कर रही बीएमसी की नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
एक ओर मनपा 33,332 परियोजना प्रभावित लोगों के आवासों के निर्माण पर करीब 20,751 करोड़ रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर पीएपी में सेंधमारी के इरादे से आरक्षित जमीन को ही कम करने की कवायद कर रही है।
माजस, जोगेश्वरी पूर्व में 1,802.75 वर्ग मीटर आरआर 2।1 आरक्षण हटाकर उसे आवासीय क्षेत्र में शामिल करने के प्रस्ताव को लेकर बीएमसी की इस दोहरी नीति पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। माजस, जोगेश्वरी पूर्व में पुनर्वास और पुनस्र्थापन के लिए आरक्षित 1,802.75 वर्ग मीटर
जमीन को आवासीय क्षेत्र में शामिल करने के प्रस्ताव का बीएमसी कांग्रेस के गुट नेता अशरफ आजमी ने कड़ा विरोध किया है। मनपा में आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने इम्प्रूवमेंट कमेटी के आइटम नंबर 7 को रद्द करने की मांग करते हुए बीएमसी की भूमि नीति पर सवाल उठाए हैं।
आजमी का कहना है कि एक ओर मनपा हजारों करोड़ रुपए खर्च कर परियोजना प्रभावित लोगों के लिए आवास तैयार कर रही है, जबकि दूसरी ओर पुनर्वास के लिए निर्धारित जमीन ही घटाई जा रही है। आजमी ने कहा कि आरआर 2।1 आरक्षण का मूल उद्देश्य पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए जमीन उपलब्ध कराना है।
ऐसे में मुंबई शहर में पुनर्वास आवास की बढ़ती जरूरत के बीच इस आरक्षित भूखंड को आवासीय क्षेत्र में बदलने का निर्णय समझ से परे है। उन्होंने बीएमसी की नीति में विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि पीएपी आवासों पर भारी-भरकम राशि खर्च करने के बावजूद डेवलपमेंट प्लान में पुनर्वास के लिए तय भूमि कम की जा रही है।
बीएमसी के ताजा पीएपी विवरण का हवाला देते हुए आजमी ने बताया कि 33,332 पीएपी मकानों की कुल परियोजना लागत करीब 20,751।67 करोड़ रुपए है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आवासों की आवश्यकता के बीच पुनर्वास के लिए उपलब्ध आरक्षित भूमि में कमी करना गंभीर चिंता का विषय है।
आजमी ने कहा कि यह विवाद केवल 1,802.75 वर्ग मीटर भूखंड तक सीमित नहीं है, मुंबई में सार्वजनिक आरक्षण, खुले मैदानों और जनहित के लिए निर्धारित भूखंडों में बदलाव की प्रवृत्ति लगातार चिंता बढ़ा रही है।
उन्होंने सेंचुरी मिल्स की जमीन, मुलुंड में पेट्रोल पंप के लिए प्रस्तावित मैदान, बांद्रा के नेविल डिसूजा फुटबॉल ग्राउंड और महालक्ष्मी रेसकोर्स की जमीन का उदाहरण देते हुए सार्वजनिक भूमि से जुड़े फैसलों की समीक्षा की जरूरत बताई।
आजमी ने महापौर और बीएमसी कमिश्नर को पत्र भेजकर इम्प्रूवमेंट कमेटी के आइटम नंबर 7 को रद्द करने की मांग की है। साथ ही सार्वजनिक उपयोग से जुड़े आरक्षणों में प्रस्तावित बदलावों की व्यापक समीक्षा कर ऐसे निर्णयों पर रोक लगाने की मांग की है।
उन्होंने बीएमसी से सार्वजनिक जमीन और पुनर्वास के लिए निर्धारित भूखंडों को संरक्षित रखने की अपील की है।
मुंबई बीएमसी के सभागृह नेता गणेश खणकर ने आजमी के आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं और विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को आवास उपलब्ध कराना तथा उनका पुनर्वास करना मनपा की जिम्मेदारी है।
उनके अनुसार, महायुति सरकार के वर्ष 2014 से कार्यकाल में विकास कार्यों के कारण प्रभावित लोगों की शिकायत नहीं मिली है।
आजमी ने कहा कि यदि डीपी-2034 में बार-बार बदलाव किए जाएंगे, तो विकास योजना की विश्वसनीयता और उसकी उपयोगिता पर सवाल उठेंगे। उन्होंने सार्वजनिक हित के लिए निर्धारित आरक्षणों में मनमाने बदलाव पर रोक लगाने की मांग की है।