BMC K West Ward Encroachment (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

जोगेश्वरी पश्चिम में बीएमसी की बड़ी लापरवाही: फुटपाथ पर अवैध दुकानों का कब्जा, खतरे में पैदल यात्रियों की जान

BMC K West Ward Encroachment: मुंबई के जोगेश्वरी (पश्चिम) वार्ड 62 में फुटपाथों पर अवैध दुकानों का कब्जा। बीएमसी की लापरवाही के कारण पैदल यात्री परेशान। कानून और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी।

अनिल सिंह

Jogeshwari West Footpath Illegal Shops: मुंबई के पश्चिमी उपनगर जोगेश्वरी (पश्चिम) में सार्वजनिक फुटपाथों पर अवैध रूप से बनी दुकानों और ढांचों ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। वार्ड नंबर 62, के-वेस्ट (K-West) के अंतर्गत आने वाले ओशिवारा और स्वामी विवेकानंद (SV) रोड पर एमटीएलएल कार्यालय के ठीक सामने फुटपाथों पर खुलेआम अतिक्रमण किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बीएमसी (BMC) प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध निर्माण के कारण आम लोगों के लिए सड़क पर चलना तक दूभर हो गया है, लेकिन बार-बार की शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

एक्स (पहले ट्विटर) पर मजहर खान नाम के यूजर (@MazharkhanBMP) ने इस मुद्दे को उठाया है। अतिक्रमण की यह समस्या केवल यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा के मानकों की भी अनदेखी कर रही है। पैदल चलने वालों के लिए बने रास्तों को व्यावसायिक उपयोग के लिए घेर लिया गया है, जिससे लोगों को मजबूरन व्यस्त सड़कों पर चलना पड़ता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। कानूनी प्रावधानों के स्पष्ट होने के बावजूद, बीएमसी की यह निष्क्रियता अब स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा और गुस्से का विषय बन गई है।

कानून की धज्जियां: धारा 314 और 351 का उल्लंघन

मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 की धारा 314 प्रशासन को यह शक्ति और जिम्मेदारी देती है कि वे बिना किसी पूर्व सूचना के सार्वजनिक मार्गों और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाएँ। वहीं, धारा 351 के तहत बिना अनुमति के किए गए किसी भी निर्माण पर नोटिस जारी कर तत्काल तोड़फोड़ की कार्रवाई अनिवार्य है। जोगेश्वरी पश्चिम के इस मामले में, ये दोनों ही कानून केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। सड़कों पर स्थायी रूप ले चुकी ये दुकानें स्पष्ट रूप से प्रशासनिक तंत्र की विफलता की ओर इशारा कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सार्वजनिक उपद्रव

उच्चतम न्यायालय ने अपने विभिन्न फैसलों में स्पष्ट रूप से कहा है कि सार्वजनिक मार्गों को अवरुद्ध करना गैरकानूनी है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है। इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता (पहले IPC) की धारा 268 के तहत सार्वजनिक उपद्रव एक दंडनीय अपराध है। जोगेश्वरी के इस क्षेत्र में जिस तरह से अतिक्रमण फैला है, वह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सार्वजनिक अव्यवस्था भी फैला रहा है। स्थानीय निवासी अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यह लापरवाही है या फिर भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत।

प्रशासनिक संरक्षण और नागरिकों की सुरक्षा का सवाल

जोगेश्वरी पश्चिम के ओशिवारा क्षेत्र में किसके संरक्षण में यह अवैध निर्माण चल रहा है, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। एमटीएनएल जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर हो रहा यह अतिक्रमण बीएमसी की सतर्कता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि जल्द ही इन अवैध ढांचों को हटाकर फुटपाथ को पैदल यात्रियों के लिए मुक्त नहीं किया गया, तो स्थानीय संगठनों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। नागरिकों की मांग है कि के-वेस्ट वार्ड के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और इस सार्वजनिक उपद्रव को तुरंत समाप्त किया जाए।

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