बीएमसी (सोर्स- सोशल मीडिया)  
मुंबई

मोशी हादसे के बाद जागी BMC: मुंबई के डंपिंग ग्राउंड्स की सुरक्षा होगी सख्त; बनेगा अलग SOP, ऑडिट के निर्देश

BMC Dumping Ground: पुणे के मोशी हादसे के बाद बीएमसी अलर्ट पर है। अतिरिक्त आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा ने मुंबई के डंपिंग ग्राउंड्स की सुरक्षा, स्टेबिलिटी ऑडिट और एसओपी के कड़े निर्देश दिए।

रूपम सिंह

Mumbai Dumping Ground Safety: पुणे के मोशी में हाल ही में हुई दुर्घटना के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर के डंपिंग ग्राउंड और ठोस कचरा प्रबंधन परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। अतिरिक्त नगर आयुक्त (पश्चिम उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और ठेकेदारों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सुरक्षा मानकों के पालन पर विशेष जोर

समीक्षा बैठक में उप आयुक्त (ठोस कचरा प्रबंधन) किरण दिघावकर, प्रमुख अभियंता अविनाश काटे, संबंधित अधिकारी, परियोजना सलाहकार और विभिन्न परियोजनाओं के ठेकेदार शामिल हुए। बैठक में प्रत्येक ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना के लिए अलग-अलग मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने और उसका सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया गया।

डंपिंग ग्राउंड पर कचरे की ऊंचाई रहेगी नियंत्रित

डॉ. विपिन शर्मा ने निर्देश दिए कि डंपिंग ग्राउंड पर कचरे की ऊंचाई निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही परियोजना स्थलों पर केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जाए और आने जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से रखा जाए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बेहतर हो सके।

स्टेबिलिटी ऑडिट और बैरिकेडिंग के निर्देश

बीएमसी ने डंपिंग ग्राउंड परिसर में स्थित शेड, कार्यशालाओं और अन्य संरचनाओं का स्टेबिलिटी ऑडिट तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कांजुरमार्ग और मुलुंड स्थित परियोजनाओं में खुदाई की पद्धतियों की समीक्षा कर अस्थिर क्षेत्रों की पहचान करने, वहां बैरिकेडिंग लगाने और जल निकासी व्यवस्था की व्यापक जांच करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

सुरक्षित कचरा प्रबंधन पर रहेगा फोकस

बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, मोशी हादसे के बाद सुरक्षा मानकों को और प्रभावी बनाने के लिए सभी ठोस कचरा प्रबंधन परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य संभावित दुर्घटनाओं को रोकना, परियोजना स्थलों पर जोखिम कम करना और कर्मचारियों तथा आसपास के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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