

Mulund Dumping Ground Biomining Project: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण डीजल की कमी का हवाला देते हुए बायो माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से मुलुंड डंपिंग ग्राउंड पर कार्य पूरा करने के लिए समय बढ़ाने की मांग किए जाने के कुछ सप्ताह बाद, बीएमसी एजेंसी को 7 लाख मीट्रिक टन कचरे के परिवहन के लिए अतिरिक्त समय देने जा रही है। गुरुवार को आयोजित एक बैठक में बीएमसी ने एजेंसी को अतिरिक्त 10 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे की बायोमाइनिंग करने की भी अनुमति देने पर सहमति जताई। यह कंपनी को दिया गया चौथा विस्तार है।
मूल रूप से बायोमाइनिंग परियोजना को वर्ष 2024 तक पूरा किया जाना था। वर्ष 2018 में बीएमसी ने बंद हो चुके मुलुंड डंपिंग ग्राउंड से 70 लाख मीट्रिक टन लीगेसी कचरा हटाने का ठेका दिया था और वर्ष 2019 में परियोजना पर वास्तविक कार्य शुरू हुआ था।
इसके बाद कंपनी को तीन बार समय विस्तार दिया गया, जिनमें पहला विस्तार कोविड-19 महामारी के कारण हुई देरी की वजह से प्रदान किया गया था। 13 मई को बायो माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने बीएमसी को पत्र लिखकर 70 लाख मीट्रिक टन प्रोसेस्ड कचरे में से 7 लाख मीट्रिक टन कचरे के परिवहन के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। कंपनी ने इसके पीछे पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते संभावित डीजल संकट को कारण बताया था।
ठेकेदार ने इसके अलावा 10 लाख मीट्रिक टन ऐसे अतिरिक्त कचरे को हटाने के लिए भी समय मांगा, जिसे पहले के सर्वेक्षण में शामिल नहीं किया गया था। हालांकि बीएमसी के टेंडर में मुलुंड डंपिंग ग्राउंड से 70 लाख मीट्रिक टन लीगेसी कचरा हटाने का प्रावधान था, लेकिन बाद में मुंबई मनपा ने पाया कि 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त लीगेसी कचरा अभी भी प्रोसेस किया जाना बाकी है।
बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "ठेकेदार ने 70 लाख मीट्रिक टन कचरे की बायोमाइनिंग पूरी कर ली है, लेकिन डीजल की कमी के कारण प्रोसेस्ड सामग्री के परिवहन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने अतिरिक्त लीगेसी कचरे को हटाने के लिए भी समय मांगा है।
उन्होंने कहा कि "नया टेंडर जारी करने के बजाय हमारा प्रयास है कि यही कार्य मौजूदा दरों पर उसी ठेकेदार को सौंपा जाए। बीएमसी के अनुसार, मुलुंड स्थल पर कार्य अगले छह महीनों में, यानी दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है।