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मुंबई

महालक्ष्मी में 702 करोड़ की भूमिगत पैदल सुरंग को मंजूरी, नेहरू सेंटर से समुद्र किनारे वॉकवे तक कनेक्टिविटी

MMRCL Mumbai Project: बीएमसी स्थायी समिति ने नेहरू साइंस मेट्रो स्टेशन से वर्ली प्रोमेनेड को जोड़ने वाले 702 करोड़ रुपये के भूमिगत पैदल मार्ग प्रस्ताव को विपक्षी विरोध के बीच मंजूरी दी।

रूपम सिंह

Mahalaxmi Underground Pedestrian Tunnel: महालक्ष्मी में नेहरू साइंस मेट्रो स्टेशन को समुद्र किनारे बने वॉकवे से जोड़ने वाली भूमिगत पैदल मार्ग परियोजना को बीएमसी स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है। गुरुवार को बीएमसी मुख्यालय में हुई स्थायी समिति की बैठक में विपक्ष के विरोध के बावजूद प्रस्ताव पारित किया गया। महायुति के पास समिति में बहुमत होने के कारण प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।

702 करोड़ रुपये से बनेगा भूमिगत मार्ग

इस परियोजना पर करीब 702 करोड़ 44 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका पूरा आर्थिक भार बीएमसी उठाएगी, जबकि निर्माण और परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) को दी गई है। बीएमसी के मुताबिक, भूमिगत मार्ग की चौड़ाई करीब 7.5 मीटर होगी। इसका उद्देश्य महालक्ष्मी क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन और पैदल यात्रियों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।

नेहरू साइंस स्टेशन से वर्ली प्रोमेनेड तक जुड़ेगा

प्रस्तावित भूमिगत पैदल मार्ग नेहरू विज्ञान केंद्र मेट्रो स्टेशन से महालक्ष्मी रेसकोर्स क्षेत्र होते हुए लाला लाजपत राय रोड के नीचे से वर्ली प्रोमेनेड और प्रस्तावित लैंडस्केप गार्डन तक पहुंचेगा।

कोस्टल रोड परियोजना के पास करीब 300 एकड़ क्षेत्र में लैंडस्केप गार्डन विकसित करने का प्रस्ताव है। मौजूदा समय में निजी वाहनों से इस क्षेत्र तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन और पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त कनेक्टिविटी नहीं है।

विपक्ष ने उठाया BMC की आर्थिक स्थिति पर सवाल

परियोजना के प्रस्ताव का विपक्षी दलों ने एकजुट होकर विरोध किया। यशवंत किल्लेदार ने सवाल उठाया कि इस परियोजना का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बीएमसी पर क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य सरकार के पास इसके लिए फंड उपलब्ध नहीं है।

कांग्रेस गुटनेता अशरफ आजमी ने भी करीब 702 करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत पर सवाल उठाया। उन्होंने बीएमसी की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि नगर निकाय पर पहले से ही बड़ी देनदारियां हैं।

इतना पैसा कहां से आएगा?

विपक्ष ने दावा किया कि इस वर्ष के अंत तक मुंबई बीएमसी को ठेकेदारों को करीब 8 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करना है। ऐसे में 702 करोड़ रुपये की नई परियोजना के लिए धन की व्यवस्था कैसे होगी, इस पर भी सवाल उठाए गए। विपक्ष ने बीएमसी के घटते आय स्रोतों और ग्रीन बॉन्ड जारी करने की तैयारी का भी मुद्दा उठाया।

इसके बावजूद स्थायी समिति ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। परियोजना पूरी होने के बाद महालक्ष्मी, वर्ली और समुद्र किनारे विकसित होने वाले नए सार्वजनिक स्थलों के बीच पैदल और सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

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