बीएमसी मेयर (सौ. फाइल फोटो ) 
मुंबई

BMC Elections 2026: महापौर पद पर सस्पेंस, रोटेशन और आरक्षण प्रक्रिया बनी मुंबई की नई बाधा

Maharashtra News: बीएमसी चुनाव संपन्न हो चुके हैं, लेकिन महापौर का चयन तुरंत नहीं होगा। आरक्षण की रोटेशन प्रक्रिया और कानूनी औपचारिकताओं के चलते मुंबई को नया महापौर मिलने में अभी वक्त लगेगा।

अपूर्वा नायक

Mumbai News In Hindi: बीएमसी के बहुप्रतीक्षित चुनाव संपन्न हो चुके हैं, लेकिन देश की आर्थिक राजधानी को फिलहाल नया महापौर मिलने में अभी समय लगेगा, इसकी वजह केवल सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच महापौर पद को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान ही नहीं है, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण एक कानूनी प्रक्रिया है, जो नए सदन के गठन के बाद ही शुरू होती है।

नगरसेवकों के चुनाव सीधे जनता द्वारा किए जाते हैं, लेकिन महापौर का चुनाव एक अलग प्रक्रिया के तहत होता है। महापौर का चयन निर्वाचित नगरसेवकों द्वारा किया जाता है। और यह पद आरक्षण की रोटेशन प्रणाली के अंतर्गत आता है।

जब तक यह तय नहीं हो जाता कि महापौर पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा, तब तक किसी भी राजनीतिक दल द्वारा उम्मीदवार घोषित करना संभव नहीं होता। इसी कारण यह लगभग तय माना जा रहा। है कि इस सप्ताह मुंबई को नया महापौर नहीं मिल पाएगा।

व्यक्ति बन सकता है महापौर

देशभर के अधिकांश शहरी स्थानीय निकायों की तरह मुंबई महानगरपालिका में भी महापौर पद आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत आता है। यह आरक्षण अनुसूचित - जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछडा वर्ग (ओबीसी) और महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर लागू किया जाता है। यह पहले से तय नहीं होता, बल्कि शहरी विकास विभाग द्वारा लॉटरी यानी चिट प्रणाली के माध्यम से निर्धारित किया जाता है।

रोटेशन प्रणाली क्यों अपनाई गई?

यह व्यवस्था संविधान के 74वें संशोधन से जुड़ी है, जिसके तहत शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और नेतृत्व के पदों पर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण अनिवार्य किया गया। नगर निगम अधिनियम के तहत ओबीसी को भी इस दायरे में शामिल किया गया है।

रोटेशन का उद्देश्य यह है कि हर वर्ग को समय-समय पर नेतृत्व का अवसर मिल सके, शहरी विकास विभाग पहले अधिसूचना जारी करता है। पूर्व कार्यकालों के आधार पर पात्र श्रेणियों की सूची तैयार की जाती है, जिसके बाद सार्वजनिक रूप से चिट निकालकर आरक्षण तय किया जाता है। एक बार यह अधिसूचित हो जाने के बाद ही नगरसेवकों की विशेष सभा बुलाकर महापौर का चुनाव कराया जाता है।

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