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लोअर परेल स्थित BMC की 5,166 वर्ग मीटर जमीन के लिए स्कायस्टीड कन्स्ट्रक्शन्स ने सबसे ऊंची बोली लगाई है।
जमीन शुरुआती तौर पर 30 साल के लिए लीज पर दी जाएगी। प्रस्ताव में अवधि को 30 साल और बढ़ाने का विकल्प भी है।
BMC ने भूखंड की शुरुआती कीमत करीब 455 करोड़ रुपए रखी थी, जबकि नीलामी में केवल दो कंपनियों ने हिस्सा लिया।
BMC Laboratory Redevelopment: राजस्व बढ़ाने और पुरानी इमारतों का पुनर्विकास करने के नाम पर बीएमसी की ओर से शहर के महत्वपूर्ण जमीनों को लंबे समय के लिए लीज पर देने का सिलसिला जारी है।
लोअर परेल स्थित बीएमसी की परीक्षण और प्रयोगशाला वाली 5,166 वर्ग मीटर की कीमती जमीन अब निजी डेवलपर के हाथों में जाने का रास्ता साफ हो गया है। इस भूखंड के लिए मंगाई गई निविदाओं में 'स्कायस्टीड कन्स्ट्रक्शन्स' नामक कंपनी ने 470 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली लगाकर बाजी मार ली है।
यह जमीन शुरुआत में 30 साल की लीज पर दी जाएगी। प्रस्ताव में मौजूदा नियमों के अनुसार, आगे इस अवधि को 30 साल और बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है। इस तरह जमीन अगले 60 वर्षों तक निजी कंपनी के कब्जे में रहने की संभावना है। बीएमसी ने इस भूखंड की शुरुआती कीमत करीब 455 करोड़ रुपए तय की थी।
स्कायस्टीड कन्स्ट्रक्शन्स की 470 करोड़ रुपए की बोली निर्धारित कीमत से केवल 3.3 प्रतिशत अधिक है। इस नीलामी में सिर्फ दो कंपनियों ने हिस्सा लिया। इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए सुधार समिति की आगामी बैठक में रखा गया है। इसमें डेवलपर को जमीन सौंपने के साथ ही भूखंड का मौजूदा आरक्षण हटाने की भी सिफारिश की गई है।
विकास योजना 2034 के तहत फिलहाल यह जमीन 'अन्य संस्थाओं की श्रेणी में आरक्षित है। आरक्षण हटाने के लिए महाराष्ट्र प्रादेशिक नियोजन एवं नगर रचना अधिनियम, 1966 की धारा 37(1) के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके अंतर्गत नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे।
आरक्षण आधिकारिक रूप से हटने के बाद ही डेवलपर को अंतिम मंजूरी पत्र जारी किया जाएगा। जी/दक्षिण विभाग में सुदाम कालू अहिरे मार्ग के पास स्थित यह भूखंड बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर है। निविदा की शतों के अनुसार, सफल डेवलपर को अपने खर्च पर बीएमसी की प्रयोगशाला के लिए 1,299 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में नई इमारत बनाकर महानगरपालिका को सौंपनी होगी। नई इमारत तैयार होने तक प्रयोगशाला का कामकाज जारी रखने के लिए डेवलपर को अस्थायी जगह भी उपलब्ध करानी होगी। वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना पुरानी इमारत को गिराने की अनुमति नहीं दी जाएगी।