BMC Job Fraud Mumbai प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI) 
मुंबई

BMC जॉब स्कैम: 43 लोगों से लाखों की ठगी, मुंबई नगर निगम की महिला कर्मचारी ने सांगली तक फैलाया जाल

BMC Job Fraud Mumbai: बीएमसी में नौकरी दिलाने के नाम पर 43 लोगों से 33 लाख रुपये की ठगी। मुख्य आरोपी बीएमसी महिला कर्मचारी समेत 4 पर केस दर्ज। कुर्ला पुलिस जांच में जुटी।

अनिल सिंह

Maya Chavan BMC Scam: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। मुंबई और पश्चिमी महाराष्ट्र के करीब 43 लोगों को ठगी का शिकार बनाकर उनसे लाखों रुपये ऐंठ लिए गए। इस घोटाले में चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य आरोपी बीएमसी की ही एक महिला कर्मचारी है। कुर्ला पुलिस ने इस मामले में 33 लाख रुपये की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है, हालांकि जांच अधिकारियों का मानना है कि पीड़ितों की संख्या और ठगी की रकम का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।

यह रैकेट केवल मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि सांगली, सतारा और कोल्हापुर जैसे जिलों के भोले-भाले युवाओं और किसानों को भी अपना निशाना बना रहा था। सरकारी नौकरी की चाहत में लोगों ने अपनी जमा-पूंजी इन जालसाजों के हवाले कर दी। इस घोटाले ने एक बार फिर सरकारी विभागों में भर्ती प्रक्रिया के नाम पर होने वाली फर्जीवाड़े की ओर ध्यान खींचा है।

रिश्तेदारों के जरिए बिछाया गया ठगी का जाल

BMC जॉब स्कैम का खुलासा तब हुआ जब सांगली के 50 वर्षीय किसान अनिल कुमार गंजारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। गंजारी के मुताबिक, जून 2024 में एक रिश्तेदार के माध्यम से उनकी मुलाकात माया चव्हाण (59) से हुई थी। माया ने दावा किया था कि वह बीएमसी के एल वार्ड (कुर्ला) में कार्यरत है और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उसके सीधे संबंध हैं। उसने चपरासी, क्लर्क और हेड क्लर्क जैसे पदों पर भर्ती का लालच दिया और उम्मीदवारों से 1.70 लाख से 2.50 लाख रुपये तक की मांग की।

फर्जी मेडिकल टेस्ट और दस्तावेजों का खेल

ठगों ने पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए पूरी प्रक्रिया को असली दिखाने की कोशिश की। पहले उम्मीदवारों से फॉर्म शुल्क के नाम पर दस्तावेज लिए गए, फिर घाटकोपर के एक अस्पताल में उनका मेडिकल चेकअप कराया गया। गंजारी ने आरोप लगाया कि प्रत्येक उम्मीदवार से मेडिकल के नाम पर 10,000 रुपये नकद वसूले गए। अगस्त 2024 से जनवरी 2025 के बीच करीब 24.68 लाख रुपये ऑनलाइन बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए और 8.30 लाख रुपये मुंबई में व्यक्तिगत रूप से नकद दिए गए।

बीएमसी कांस्टेबल और फर्जी इंजीनियरों की संलिप्तता

कुर्ला पुलिस की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी माया चव्हाण बीएमसी में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत है। इस साजिश में उसके साथ प्रथमेश चव्हाण, सुरेंद्र गुरव और राहुल जाधव नामक व्यक्ति भी शामिल हैं। राहुल जाधव खुद को बीएमसी का इंजीनियर बताता था। इन आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र, आधिकारिक मुहरों और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया ताकि उम्मीदवारों को यह लगे कि भर्ती प्रक्रिया वैध है। पुलिस अब इन सभी संदिग्धों की तलाश कर रही है और उनके बैंक खातों को खंगाल रही है।

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