

New Local Train in Mumbai: मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों से गिरकर होने वाले हादसों को रोकने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है।
अब तक मुंबई में केवल एसी लोकल ट्रेनों में ही ऑटोमैटिक दरवाजे उपलब्ध थे, जिनका किराया सामान्य लोकल से काफी अधिक होता है। लेकिन अब सामान्य किराए में सफर करने वाले लाखों यात्री भी बंद दरवाजों वाली सुरक्षित ट्रेन का लाभ उठा सकेंगे। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और अनचाही दुर्घटनाओं पर काफी हद तक ब्रेक लगेगा।
NDTV मराठी ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि अगले एक हफ्ते के भीतर मुंबई की पटरियों पर स्वचालित दरवाजों वाली नॉन-एसी (Non-AC) लोकल ट्रेन दौड़ती नजर आएगी। यह कदम विशेष रूप से पीक आवर्स के दौरान बढ़ती भीड़ और खुले दरवाजों से गिरकर होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुंबई उपनगरीय रेलवे नेटवर्क पर हर साल सैकड़ों यात्री चलती ट्रेन से गिरकर अपनी जान गंवा देते हैं या गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। हाल के आंकड़ों ने रेलवे बोर्ड की चिंता बढ़ा दी थी, जिसके बाद 'क्लोज्ड डोर' (Closed Door) तकनीक को नॉन-एसी ट्रेनों में भी लागू करने का निर्णय लिया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह नई ट्रेन न केवल सुरक्षित होगी, बल्कि इसमें वेंटिलेशन का भी विशेष ध्यान रखा गया है ताकि दरवाजे बंद होने पर यात्रियों को उमस या ऑक्सीजन की कमी महसूस न हो।
इस नई नॉन-एसी लोकल ट्रेन में लगे दरवाजे आधुनिक सेंसर तकनीक से लैस हैं। जब तक सभी दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हो जाते, तब तक ट्रेन प्लेटफॉर्म से नहीं चलेगी। इसी तरह, ट्रेन के पूरी तरह रुकने के बाद ही दरवाजे खुलेंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें आपातकालीन अलार्म और टॉक-बैक सिस्टम भी लगाया गया है। शुरुआत में इसे एक 'पायलट प्रोजेक्ट' के रूप में चलाया जाएगा, और यात्रियों की प्रतिक्रिया के आधार पर भविष्य में अन्य लोकल ट्रेनों में भी इसी तरह के दरवाजे लगाए जाएंगे।
मुंबईकरों के लिए यह किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। अब तक सुरक्षित सफर के लिए यात्रियों को एसी लोकल का इंतजार करना पड़ता था, जिसकी फ्रीक्वेंसी कम है और किराया ज्यादा। नई नॉन-एसी ऑटोमैटिक ट्रेन सामान्य मासिक पास और टिकट पर उपलब्ध होगी। रेलवे का मानना है कि इस बदलाव से न केवल एक्सीडेंट कम होंगे, बल्कि ट्रेनों की समयबद्धता (Punctuality) में भी सुधार होगा क्योंकि खुले दरवाजों के कारण होने वाली देरी और चेन पुलिंग की घटनाओं में कमी आएगी।