बृहन्मुंबई महानगरपालिका (सोर्स-सोशल मीडिया) 
मुंबई

BMC सदन में जोरदार हंगामा: सांताक्रूज के अस्पताल में 2 साल से काम कर रहा था फर्जी डॉक्टर, विपक्ष के तीखे सवाल

Mumbai Hospital Scandal: बीएमसी के वी.एन. देसाई अस्पताल के आईसीयू में 2 साल से फर्जी डॉक्टर के काम करने का खुलासा। मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, सदन में विपक्ष ने किया हंगामा।

रूपम सिंह

Mumbai Hospital Scandal Fake Doctor ICU: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्था, ठेका प्रणाली के तहत नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर मंगलवार को बीएमसी सदन में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ठेकेदारी व्यवस्था के कारण अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति हो रही है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है।

विवाद का केंद्र सांताक्रूज स्थित वी.एन. देसाई अस्पताल में सामने आया एक सनसनीखेज मामला रहा, जहां एक निजी ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त बिना पंजीकरण वाला व्यक्ति पिछले दो वर्षों से आईसीयू में डॉक्टर के रूप में कार्यरत था। मामले के उजागर होने के बाद विपक्षी सदस्यों ने बीएमसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने सदन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि केईएम, नायर, कूपर, सायन और अन्य प्रमुख उपनगरीय अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों गरीब और जरूरतमंद मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में बिना आवश्यक योग्यता और वैध पंजीकरण वाले लोगों को चिकित्सकीय जिम्मेदारियां सौंपना बेहद गंभीर लापरवाही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों द्वारा नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां की जा रही हैं और प्रशासन पर्याप्त निगरानी करने में विफल रहा है।

पेडणेकर ने कहा कि अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज और उनके परिजन सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा करते हैं, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं उस विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सभी अस्पतालों में नियुक्त चिकित्सा कर्मियों की तत्काल जांच की मांग की।

मनपा प्रशासन को नोटिस

इस बीच, वी.एन. देसाई अस्पताल के मामले का मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने बीएमसी प्रशासन और पुलिस को नोटिस जारी कर मामले की विस्तृत जानकारी मांगी है। इससे प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव और बढ़ गया है।

सदन में जोगेश्वरी स्थित बालासाहेब ठाकरे ट्रॉमा केयर अस्पताल का मुद्दा भी उठा। यहां ठेका कर्मचारियों को नवंबर 2024 से वेतन नहीं मिलने के कारण आंदोलन करना पड़ा था। विपक्ष ने इसे भी ठेका प्रणाली की विफलता का उदाहरण बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। प्रशासन ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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