Mumbai Ghatkopar Sewage Treatment Plant: समुद्र में पहुंचने वाले प्रदूषित मलजल को नियंत्रित करने और समुद्री पानी की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बीएमसी ने घाटकोपर मलजल प्रक्रिया केंद्र (एसटीपी) का काम तेज कर दिया है। घाटकोपर (पूर्व) में तैयार हो रहे इस केंद्र की क्षमता प्रतिदिन 337 मिलियन लीटर (एमएलडी) मलजल के उपचार संयंत्र की होगी।
बीएमसी ने इसके महत्वपूर्ण लिक्विड पाइपलाइन का काम 31 दिसंबर 2026 तक और पूरी परियोजना को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अतिरिक्त मनपा आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने गुरुवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण कर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुंबई मलनि सारण परियोजना के तहत बनाए जा रहे इस केंद्र में सिक्वेंशियल बैच रिएक्टर (एसबीआर) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक उन्नत 'एक्टिवेटेड स्लज' प्रक्रिया है, जिसमें पानी को अलग-अलग टैंकों में ले जाने के बजाय एक ही टैंक में क्रमबद्ध तरीके से ट्रीट किया जाता है।
उपचारित पानी का विभिन्न उपयोगों के लिए पुनः इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे समुद्र में प्रदूषित पानी के प्रवाह को कम करने के साथ समुद्री पर्यावरण और जलीय जीवों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। मुंबई घाटकोपर, मानखुर्द, गोवंडी और चेंबूर क्षेत्र के नागरिकों को इस परियोजना का लाभमिलेगा।
निरीक्षण के दौरान बांगर ने प्रक्रिया टंकियों, इनलेट-आउटलेट व्यवस्था, पंप हाउस, स्लज प्रक्रिया इकाई, आंतरिक पाइपलाइन सहित विभिन्न स्थापत्य कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
पंप, एरेशन ब्लोअर्स, स्क्रीनिंग और स्लज प्रक्रिया प्रणाली, यांत्रिक उपकरणों तथा पाइपिंग की स्थापना का भी जायजा लिया गया।
इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर, विद्युत पैनल, केबलिंग, मोटरों की बिजली आपूर्ति, ऑटोमेशन, एससीएडीए और बैकअप बिजली व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए साइट पर मनुष्यबल बढ़ाकर करीब 1,000 कर्मचारी तैनात किए गए है।
बांगर ने परियोजना पूरी होने तक अतिरिक्त मनुष्यबल बनाए रखने के निर्देश दिए। सभी कार्य समानांतर और तेज गति से पूरा करने के साथ गुणवता, सुरक्षा और कार्यक्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा।
वीं, बांद्रा, धारावी, वर्सोवा, मालाड, भांडुप और घाटकोपर में कुल सात एसटीपी परियोजनाएं विकसित की जा रही है। एमबीआर (मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर), एसबीआर (सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर) तथा कॉन्स्टेट फ्लो जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
यह परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई शहर को लगभग 1,200 एमएलडी उपचारित पानी उपलब्ध होगा इस पानी का उपयोग औद्योगिक इकाइयों, सफाई कार्यों और सड़कों के किनारे लगाए गए पेड़ों की सिंचाई के लिए आसानी से किया जा सकेगा।