राज ठाकरे व उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

BMC चुनाव में ठाकरे भाइयों की वापसी का गेमप्लान! क्या 'MaMu' फैक्टर बचा पाएगा राज-उद्धव की राजनीतिक विरासत?

BMC Election से पहले राज और उद्धव ठाकरे एक मंच पर आए हैं। मराठी अस्मिता के नाम पर ‘MaMu’ रणनीति अपनाते हुए उन्होंने हिंदी और उत्तर भारतीय मुद्दे पर आक्रामक रुख लिया। क्या यह चुनावी मुद्दा बन पाएगा?

आकाश मसने

Thackeray Brothers BMC Election Strategy: मुंबई महानगर पालिका (BMC) के आगामी चुनावों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बरसों के मतभेद भुलाकर राज और उद्धव ठाकरे एक मंच पर आए हैं। उन्होंने इसे मराठी अस्मिता को बचाने की 'आखिरी जंग' करार देते हुए उत्तर भारतीयों और हिंदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

ठाकरे भाइयों की 'मराठी-मुस्लिम' रणनीति और राजनीतिक दांव देश की सबसे बड़ी और अमीर नगर पालिका, बीएमसी में मराठी मतदाताओं की संख्या करीब 40 फीसदी है। ठाकरे बंधुओं ने इसी वोट बैंक को साधने के लिए 72 मराठी और 41 मुस्लिम बहुल वार्डों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसे 'MaMu' (मराठी-मुस्लिम) फैक्टर कहा जा रहा है।

राज ठाकरे ने शिवतीर्थ मैदान की संयुक्त रैली में साफ कहा कि यह मराठी मानुष के लिए अस्तित्व का आखिरी चुनाव है। उन्होंने मतदाताओं को आगाह किया कि यदि इस बार मौका हाथ से निकल गया, तो मराठी जनता का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। उद्धव ठाकरे भी इस मंच पर मौजूद थे और उन्होंने राज के इस रुख का पूरा समर्थन किया।

हिंदी भाषा और उत्तर भारतीयों पर तीखा प्रहार

राज ठाकरे ने अपने पुराने कड़े तेवर दिखाते हुए एक बार फिर उत्तर भारतीयों, विशेषकर यूपी और बिहार के लोगों को निशाने पर लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदी उत्तर भारतीयों की भाषा हो सकती है, लेकिन यह महाराष्ट्र की भाषा नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हिंदी को महाराष्ट्र पर थोपने की कोशिश की गई, तो वे 'लात' मारेंगे।

बालासाहेब ठाकरे ने साथ राज व उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)

राज का तर्क है कि बाहरी लोग बड़ी संख्या में महाराष्ट्र आकर यहां के लोगों का हिस्सा और जमीन छीन रहे हैं, जिससे स्थानीय संस्कृति और भाषा खतरे में है। दोनों भाइयों का मानना है कि भाजपा के नेतृत्व में मराठी भाषा को दबाने का प्रयास हो रहा है।

क्या मुंबई का नाम बदलकर 'बंबई' करने की साजिश है?

उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर मुंबई के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक बंटवारे का आरोप लगाया है। उन्होंने तमिलनाडु के भाजपा नेता के. अन्नामलाई के एक वायरल बयान को आधार बनाते हुए सवाल उठाया कि क्या भाजपा मुंबई का नाम बदलकर फिर से 'बंबई' करना चाहती है। अन्नामलाई ने मुंबई को केवल महाराष्ट्र का हिस्सा न बताकर एक 'अंतर्राष्ट्रीय शहर' कहा था। उद्धव ने पलटवार करते हुए कहा कि मुंबई को खून बहाकर हासिल किया गया था और इसे महाराष्ट्र से अलग करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भाजपा पर राष्ट्र के ऊपर भ्रष्टाचार को रखने का भी इल्जाम लगाया।

भाजपा और शिंदे गुट का पलटवार

विपक्ष के इन तीखे हमलों पर भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भी जवाबी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि खतरा मुंबई को नहीं, बल्कि ठाकरे भाइयों की राजनीतिक दुकान को है। भाजपा का तर्क है कि अन्नामलाई के बयान को संदर्भ से बाहर निकालकर पेश किया जा रहा है। खुद अन्नामलाई ने सफाई दी कि मुंबई को वर्ल्ड क्लास कहना मराठियों के योगदान को कम करना नहीं है। भाजपा और शिंदे गुट ने ठाकरे की रणनीति की काट के लिए 60 मराठी और 21 मुस्लिम बहुल वार्डों में अपनी मजबूत घेराबंदी कर ली है।

राजनीतिक अस्तित्व का सवाल

यह चुनाव ठाकरे परिवार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। राज और उद्धव यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे हिंदुत्व और महाराष्ट्र के हितों के लिए अपने मतभेदों को भुला चुके हैं। जहां ठाकरे बंधु 'मराठी अस्मिता' और 'MaMu' फैक्टर के भरोसे हैं, वहीं भाजपा और शिंदे गुट अपने 'हिंदुत्व' और विकास के एजेंडे को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मुंबई की जनता ठाकरे भाइयों के इस 'आखरी दांव' पर भरोसा जताती है या फिर राजनीति की दिशा बदल जाती है।

इसे इस तरह समझा जा सकता है जैसे दो पुराने साथी अपनी खोई हुई विरासत को बचाने के लिए एक साथ आए हों और वे अपनी जमीन बचाने के लिए हर बाहरी प्रभाव को दीवार बनकर रोकने की कोशिश कर रहे हों।

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