बीएमसी की 6 स्वास्थ्य सुविधाएं 30 साल के लिए निजी हाथों में।
ओपीडी शुल्क ₹1,500 और प्रसूति खर्च ₹60,000 तक होने की आशंका।
स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष ने प्रशासन पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाया।
आजमी ने दो स्वास्थ्य सुविधाओं के टेंडर रद्द करने की मांग की।
गरीब मरीजों के लिए 30% बेड मुफ्त रखने की मांग।
BMC Maternity Home Privatization PPP Model Healthcare: 14 फीट से ऊपर झोपड़ों को तोड़ने के बाद विवादों में घिरी बीएमसी एक बार फिर तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। बीएमसी ने अब आमजन से जुड़े दवाखाने व प्रसूतिगृह को निजी हाथों में देने की योजना बनाई है।
बीएमसी दवाखानों में आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति किफायती इलाज कराने के लिए जाता है और इसे ही निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। दरअसल, बीएमसी की छह स्वास्थ्य सुविधाओं को 30 साल के लिए निजी संचालकों के हवाले करने की योजना को लेकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त और किफायती इलाज उपलब्ध कराने पर सवाल उठने लगे हैं।
इस प्रस्ताव पर प्रशासन की कार्यप्रणाली की भी आलोचना हो रही है। स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांदिर्गे ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इस फैसले के बारे में उन्हें जानकारी तक नहीं दी। इस टेंडर के तहत दहिसर, चांदीवली, अंधेरी के मोगरा, खार पश्चिम प्रसूतिगृह एवं दवाखाना, मानखुर्द-मंडाला और विक्रोली-पार्कसाइट स्थित स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। इस प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल लागू होने के बाद भी क्या आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त प्रसूति सेवाएं, सस्ती बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) परामर्श सुविधा और अस्पतालों में बिस्तर उपलब्ध होते रहेंगे।
टेंडर रद्द करो आजमी ने खार पश्चिम प्रसूतिगृह और विक्रोली-पार्कसाइट स्वास्थ्य सुविधा से संबंधित निविदाएं रद्द करने की मांग की है। मंजूरी की प्रक्रिया, प्रस्तावित शुल्क और मरीजों के हितों की सुरक्षा के उपायों पर मुंबई बीएमसी का जवाब अहम होगा। इससे स्पष्ट होगा कि यह व्यवस्था नागरिकों के लिए किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी या उन तक पहुंच सीमित कर सकती है।
बीएमसी कांग्रेस गुट नेता अशरफ आजमी ने इस प्रस्ताव पर व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए निविदा प्रक्रिया को लेकर प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए, वहीं भांदिर्गे ने कहा कि संबंधित समिति के अध्यक्ष को विश्वास में लिए बिना फैसले लेने की प्रवृत्ति प्रशासन को बंद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, स्प्रशासन को अपनी इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा कि अध्यक्ष को जानकारी दिए बिना अपने स्तर पर फैसले लेते रहो और कोई सवाल नहीं उठाएगा। मनोनीत नगरसेवक नितेश सिंह ने भी पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना फैसले लेने को अनुचित बताया।
आजमी ने दावा किया कि फिलहाल 10 रुपये में उपलब्ध ओपीडी परामर्श शुल्क प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बढ़कर 1,500 रुपये तक पहुंच सकता है। खार पश्चिम प्रसूतिगृह में वर्तमान में मुफ्त होने वाली प्रसूति के लिए 60,000 रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि, निविदा दस्तावेजों के आधार पर इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
निविदा की शर्ते यह तय करने में अहम होंगी कि निजी संचालकों के लिए मौजूदा मुफ्त सेवाएं जारी रखना और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों के लिए बिस्तर आरक्षित रखना अनिवार्य होगा या नहीं।
खार पश्चिम प्रसूतिगृह को लेकर विशेष चिता जताई जा रही है, क्योंकि मुफ्त प्रसूति सेवाओं पर निर्भर महिलाओं पर मौजूदा सुविधाओं में बदलाव होने की स्थिति में आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। प्रसूति सेवाएं मुफ्त रहेंगी या नहीं, निजी संचालक कितना शुल्क वसूल सकेंगे और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने पर क्या दंड लगाया जाएगा, आजमी ने करीब 500 करोड़ रुपये के भूमि मूल्य का हवाला देते हुए 30 साल की प्रस्तावित व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। निजी संचालकों की जरूरत पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए मरोल मे प्रस्तावित 6 मंजिला पॉलीक्लिनिक का उल्लेख किया।
बीएमसी प्रशासन को प्रशासकीय मानसिकता से बाहर निकलने की जरुरत है। प्रशासन ने इस विषय को लेकर हमें सूचित नहीं किया। यह गंभीर मामला है। मैं स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त शरद उघडे से इस संबंध में डिटेल रिपोर्ट मांगी है जो सोमवार तक उपलब्ध कराई जाएगी।हरीश भांदिर्गे (स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष, बीजेपी)
इस संबंध में मैं पत्र लिखा हूं। मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 की धारा 61 के तहत सार्वजनिक अस्पतालों और औषधालयों का संचालन बीएमसी प्रशासन का अनिवार्य दायित्व है। खार प्रसूति गृह और पार्कसाइट अस्पताल का टेंडर वापस लेने तथा गरीब मरीजों के लिए कम से कम 30 प्रतिशत बिस्तर मुफ्त रखने की मांग की गई है।अशरफ आजमी (कांग्रेस गुट नेता, बीएमसी)