बोरीवली में 5.8 किमी मलजल सुरंग का 90% काम पूरा।
बोरीवली से मालाड तक सुरंग बनाने में बड़ी प्रगति।
दहिसर, बोरीवली, गोराई, शिंपोली और चारकोप को मिलेगा फायदा।
मलजल परिवहन क्षमता 1,136 मिलियन लीटर प्रतिदिन तक बढ़ेगी।
परियोजना पूरी करने का लक्ष्य 31 जुलाई 2027
Borivali Malad Sewerage Tunnel Project: पश्चिमी उपनगरों में सीवरेज लाइनों पर बढ़ते दबाव और मलजल निकासी की समस्या को दूर करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की प्राथमिक मलजल सुरंग परियोजना में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
परियोजना के पहले चरण में शुक्रवार को बोरीवली के डॉन बॉस्को स्कूल जंक्शन पर अंतिम ‘ब्रेक-थ्रू’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसके साथ ही 5.8 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। प्रशासन ने पूरी परियोजना को 31 जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
यह भूमिगत सुरंग बोरीवली के डॉन बॉस्को स्कूल जंक्शन से मालवणी-मालाड स्थित नए मालाड पंपिंग स्टेशन तक बनाई जा रही है। परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी उपनगरों के मौजूदा सीवरेज नेटवर्क पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करना और मलजल के परिवहन को अधिक प्रभावी बनाना है।
सुरंग के शुरू होने से दहिसर, बोरीवली, गोराई, शिंपोली और चारकोप के निवासियों को राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल इन क्षेत्रों में मौजूदा सीवरेज नेटवर्क की क्षमता जरूरत के मुकाबले कम पड़ रही है। इसके कारण पाइपलाइनों के जरिए पर्याप्त मात्रा में मलजल का परिवहन करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। नई सुरंग से निकासी व्यवस्था मजबूत होने और मौजूदा नेटवर्क पर दबाव घटने की संभावना है।
मुंबई बीएमसी सीवरेज सुरंग परियोजना के पूरा होने पर मलजल परिवहन की क्षमता बढ़कर प्रतिदिन 1,136 मिलियन लीटर तक पहुंचने में मदद मिलेगी। वहीं, सुरंग की आंतरिक क्षमता के अनुसार इसकी मलजल वहन क्षमता 1,182 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इससे पश्चिमी उपनगरों में बढ़ती मलजल निकासी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बीएमसी सीवरेज सुरंग परियोजना के तहत गोराई, शिंपोली, चारकोप और मालाड के चार पंपिंग स्टेशनों की जरूरत समाप्त होने की संभावना जताई गई है। इससे मलजल निकासी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। अब परियोजना का शेष काम पूरा करने पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर सुरंग को चालू किया जा सके।