Nitesh Rane Bakrid Virtual Qurbani Controversy: महाराष्ट्र में बकरीद के नजदीक आते ही जहां एक तरफ 'बकरा शेड' और कुर्बानी के नियमों को लेकर सामाजिक और प्रशासनिक तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के भीतर ही नेताओं की जुबानी जंग खुलकर सामने आ गई है। हाल ही में भाजपा विधायक नितेश राणे ने पर्यावरण और सामाजिक व्यवस्था का हवाला देते हुए मुस्लिम समुदाय को कंप्यूटर पर 'वर्चुअल' तरीके से या कागज के बकरे बनाकर प्रतीकात्मक कुर्बानी देने की अजीबोगरीब सलाह दी थी। इस बयान से नाराज भाजपा नेता हाजी अराफात शेख ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए नितेश राणे पर सीधा और तीखा हमला बोला।
हाजी अराफात शेख ने नितेश राणे को इतिहास और उनके पारिवारिक व्यवसाय की याद दिलाते हुए कहा, "नितेश राणे को थोड़ा समझना चाहिए कि यह एक पवित्र धार्मिक त्योहार है। सबसे बड़ी बात यह है कि उनका खुद का गोश्त का पारिवारिक बिजनेस रहा है। उनके आदरणीय पिताजी नारायण राणे खुद गोश्त की दुकान चलाकर ही राजनीति में आगे बढ़े, राज्य के मुख्यमंत्री बने और केंद्र सरकार में इतने बड़े ओहदों तक पहुंचे हैं। खुद नारायण राणे साहब ने मुझे कई बार यह किस्से बड़े चाव से सुनाए हैं।"
नितेश राणे के शाकाहार और पर्यावरण प्रेम पर सवाल उठाते हुए अराफात शेख ने कहा कि राणे परिवार आज भी बड़े पैमाने पर नॉनवेज (मांसाहार) के कारोबार से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, "नितेश राणे की माताजी के नाम पर मुंबई में एक मशहूर होटल संचालित होता है, जहां बेहद लजीज मटन मसाला, केकड़े (क्रैब) और मछलियां मिलती हैं। जब आपके खुद के घर में और होटल में लोग चाव से मटन खा रहे हैं, तो आपको दूसरों के खान-पान या त्योहार पर ऐसी टिप्पणियां शोभा नहीं देतीं। बेहतर होगा कि आप अपने होटल और मटन की दुकान की तरफ ही ध्यान दें।"
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बकरे की 'वर्चुअल' और 'कागजी' कुर्बानी के सुझाव पर बेहद तल्ख लहजे में प्रतिक्रिया देते हुए अराफात शेख ने कहा कि शायद नितेश राणे को बचपन में स्कूल के दिनों में पेपर क्राफ्ट और कागज की नावें बनाने का बहुत शौक रहा होगा, इसीलिए आज उन्हें हर जगह कागज ही दिखाई दे रहा है। शेख ने चुनौती देते हुए कहा, "अगर राणे जी को कागज से इतना ही लगाव है, तो मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि वे आने वाले रविवार को अपने भोजन में असली मटन के बजाय जरा कागज के टुकड़े चबाकर देखें कि उन्हें कैसा स्वाद आता है। तब शायद उन्हें समझ आएगा कि आस्था और वास्तविकता में क्या अंतर होता है।"
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों (Assembly Election 2026) से ठीक पहले भाजपा के दो बड़े नेताओं के बीच खुलकर सामने आई इस कलह ने महायुति (BJP-शिवसेना-NCP) के शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ जहां नितेश राणे जैसे नेता बहुसंख्यक वोट बैंक को साधने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ हाजी अराफात शेख जैसे नेता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे और मुस्लिम मतदाताओं को छिटकने से बचाने के लिए अपनी ही पार्टी के सहयोगियों के खिलाफ मोर्चा खोलने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि इस अंदरूनी 'मटन और राजनीति' के घमासान पर भाजपा आलाकमान क्या रुख अपनाता है।